ईरान नाकाबंदी: CENTCOM ने 130 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला

मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। ईरान पर लागू की गई नौसैनिक नाकाबंदी के दौरान अब तक 130वें वाणिज्यिक जहाज को सफलतापूर्वक दूसरे रास्ते पर मोड़ा गया है। यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य ईरान की समुद्री गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखना है।
बता दें कि इस नाकाबंदी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 14 जुलाई 2026 के निर्देश के बाद दोबारा लागू किया गया था। इससे पहले अप्रैल से जून 2026 के बीच भी एक प्रारंभिक चरण चलाया गया था। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सैन्य बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी ऐसे जहाज के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं जो इन प्रतिबंधों को तोड़ने की कोशिश करेगा।
सख्त कार्रवाई और मानवीय मदद
इस ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 हफ्तों में नियमों का उल्लंघन करने वाले या IRGC के 'शैडो नेटवर्क' से जुड़े 13 जहाजों को नष्ट कर दिया गया है, जबकि 3 जहाजों को बेकार कर दिया गया। हालांकि, अमेरिका ने मानवीय सहायता ले जा रहे 70 से अधिक जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी है।
CENTCOM का दावा है कि यह नाकाबंदी 100 प्रतिशत प्रभावी रही है, जिससे ईरान के 'डार्क फ्लीट' टैंकर अब खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका सीधा असर ईरान के तेल भंडार पर पड़ा है, जो तेजी से कम हो रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'समुद्री डकैती' और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करार दिया है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, समुद्री दबाव से बचने के लिए ईरान अब कैस्पियन सागर के रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है, जहां मार्च से अगस्त 2026 के बीच कार्गो वॉल्यूम में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास काम करने वाले नाविकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और अमेरिकी नौसेना के साथ संपर्क बनाए रखें।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश एयरक्राफ्ट कैरियर छह महीने के मिशन के बाद थाईलैंड पहुंच चुका है, जिसने इस नाकाबंदी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।