चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, अगस्त 2026 में 65.2% तक पहुंची पैट्रेशन.

चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है और इस क्षेत्र में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर लिया है। चीन में ईवी यानी इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग अगस्त 2026 में बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़े चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए हैं, जिससे यह साफ होता है कि वहां के लोग तेजी से पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को छोड़कर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपना रहे हैं। दुनिया भर में पर्यावरण और आधुनिक तकनीक को लेकर जो बदलाव हो रहे हैं, उनमें चीन सबसे आगे निकल गया है और लगातार नए मील के पत्थर हासिल कर रहा है।
चीन में गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री और न्यू एनर्जी व्हीकल्स का क्रेज
अगस्त 2026 के महीने में मुख्य भूमि चीन में कुल 15.4 लाख यानी 1,540,000 वाहन बिके थे। इन बेचे गए वाहनों में से 10.05 लाख यानी 1,005,000 गाड़ियां नई ऊर्जा से चलने वाली यानी न्यू एनर्जी व्हीकल्स थीं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन में भी भारी उछाल देखने को मिला और अगस्त 2026 में यह संख्या बढ़कर 16,43,000 यूनिट्स हो गई, जबकि जुलाई के महीने में यह आंकड़ा 1,561,000 यूनिट्स था। इस तेजी से हो रही वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी और बाजार में नए ईवी मॉडल का आना है। साल 2025 में अकेले चीन ने दुनिया भर के कुल ईवी निर्माण का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया था और उस साल 13 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बेची थीं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और समुद्री रास्तों की स्थिति
दूसरी तरफ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री तनाव लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। बीते 11 सितंबर 2026 को ईरान ने सैन्य हमलों के जवाब में इस क्षेत्र के शिपिंग रूट्स को निशाना बनाया था। हालांकि पहले ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने इस जलडमरूमध्य से जुड़ी समस्याओं को सुलझा लिया है, लेकिन जमीनी हकीकत काफी उलझी हुई है। इस साल अप्रैल 2026 में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए ईरान से जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अपील की थी। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन के टैंकर जैसे कि 'Rich Starry' ने इस रास्ते को सफलताપૂર્વक पार किया है, हालांकि अमेरिकी युद्धपोतों की चेतावनियों के बाद दूसरे कई जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।
भारत में ईवी बाजार की स्थिति और सरकारी योजनाएं
अगर भारत की बात की जाए तो वह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के मामले में अभी चीन से काफी पीछे चल रहा है। हालांकि भारतीय सरकार इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए PM E-DRIVE योजना चलाई जा रही है। यह योजना 1 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई है और 31 मार्च 2028 तक चलेगी, जिस पर सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की तरह इलेक्ट्रिक कारों पर सीधा केंद्रीय नकद अनुदान नहीं मिलता है, लेकिन इन्हें सामान्य गाड़ियों के मुकाबले केवल 5 प्रतिशत की घटी हुई जीएसटी दर का फायदा मिलता है, जबकि पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों पर 18 से 40 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। इसके साथ ही 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए यूनियन बजट में केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में दुर्लभ खनिज गलियारों के लिए पहल की घोषणा की गई थी, और ऑटो कलपुर्जों के लिए पीएलआई योजना का विस्तार करते हुए 5,940 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि अगस्त 2026 के आखिर में सामने आई रिपोर्टों से यह संकेत मिले हैं कि सब्सिडी नियमों में संभावित बदलावों के कारण इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइकों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है।