China-Nepal Border: चीन और नेपाल सीमा पर बैरियर झील फटने से मची तबाही, रेस्क्यू ऑपरेशन रुका और 1500 लोग लापता.

चीन और नेपाल की सीमा पर स्थिति उस समय बेहद गंभीर हो गई जब 28 अगस्त 2026 को एक बड़ी बैरियर झील अचानक फट गई। इस प्राकृतिक आपदा के कारण वहां चल रहे राहत और बचाव कार्यों को तुरंत रोकना पड़ा है। आपको बता दें कि यह झील 26 अगस्त 2026 को आए भयंकर बाढ़ और मिट्टी के बहाव यानी मडस्लाइड के बाद बनी थी। ग्लेशियर टूटने की वजह से आए इस मलबे के बहाव ने दोनों देशों में भारी तबाही मचाई है और अब तक मरने वालों की संख्या 500 से 600 के बीच पहुंच चुकी है। अकेले नेपाल में 469 से 579 लोगों की मौत की खबर है, जबकि चीन के तिब्बत इलाके में कम से कम 5 लोगों की जान गई है।
लापता लोगों में कई देशों के नागरिक शामिल
इस खतरनाक आपदा की वजह से दोनों देशों में 1,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में भारत, अमेरिका, मलेशिया, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, जर्मनी, रूस, दक्षिण अफ्रीका और लातविया जैसे तमाम देशों के विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शुक्रवार को इस बैरियर झील का पानी तेजी से बढ़कर 2.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक हो गया, जबकि एक दिन पहले यह पानी 1.5 से 2 मिलियन क्यूबिक मीटर के आसपास था। पानी के इस तरह अचानक बढ़ने से नेपाल के रसुवा जिले के निचले इलाकों में भारी खतरा पैदा हो गया, जिसके बाद वहां के स्थानीय लोगों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे इलाकों की तरफ भागना पड़ा।
चीनी और नेपाली प्रशासन की कार्रवाई
चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, खतरे को भांपते हुए चीनी बचाव दलों और गाड़ियों को तुरंत सुरक्षित इलाकों में वापस बुला लिया गया। वहीं दूसरी तरफ, नेपाली अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए अपने बचाव कार्यों को केवल 90 मिनट के लिए रोका और फिर हालात को काबू में बताते हुए काम दोबारा शुरू किया। रेड क्रॉस संस्था के अनुमान के मुताबिक इस भयंकर आपदा की चपेट में करीब 90,000 लोग आ चुके हैं। इस तबाही में सड़कें, बड़े-बड़े पुल और हाइड्रोपवर प्लांट जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी चीजें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें
हालात से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने अपने करीब 30,000 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा है, साथ ही चीन की तरफ से भी 500 बचाव और पैरामिलिट्री कर्मियों को लगाया गया है। हालात का जायजा लेने के लिए खुद चीन के प्रधानमंत्री ली किआंग ने ग्यारोंग काउंटी में आपदा स्थल का दौरा किया। राहत कार्यों में बेहतर तालमेल बिठाने के लिए नेपाल का नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी, नेपाल टूरिज्म बोर्ड, यूएन ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट जैसी कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। हालांकि सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर टूटने की वजह से रास्ता पूरी तरह बंद है, जिसके चलते फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए लगातार हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद पहुंचनी शुरू हो चुकी है, जिसके तहत यूरोपीय संघ ने 2 मिलियन यूरो और सिंगापुर रेड क्रॉस ने 50,000 सिंग्प्पूर डॉलर की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। काठमांडू से अल जजीरा की पत्रकार मिनेल फर्नांडीज और बीजिंग से कैटरीना यू लगातार इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।