China-Nepal Border Flood: चीन और नेपाल बॉर्डर पर बाढ़ से तबाही, मरने वालों की संख्या हुई 1,003 और हजारों लोग अभी भी लापता.

चीन और नेपाल बॉर्डर पर आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जहां अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,003 हो गई है। राहत और बचाव कार्य का आज 7वां दिन यानी 1 सितंबर 2026 है, लेकिन अभी भी हजारों लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। इस आपदा की मुख्य वजह 26 अगस्त 2026 को हुआ ग्लेशियर का टूटना और भारी भूस्खलन था, जिसने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में 987 और चीन के तिब्बत में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र में कुल 4,462 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें नेपाल से 3,916 और तिब्बत से 546 लोग शामिल हैं। इस भयंकर आपदा में सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है।
विदेशी नागरिकों की स्थिति और लापता लोगों का विवरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में लापता होने वालों में 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जबकि तिब्बत में यह आंकड़ा 261 है। लापता लोगों की सूची में दुनिया भर के कई देशों के नागरिक शामिल हैं। इनमें 288 भारतीय नागरिक, 127 नेपाली पर्यटक, 80 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 यूके के नागरिक शामिल हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि उनके 13 नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि लगभग 80 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, तिब्बत के अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों में सौ से ज्यादा नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। लापता लोगों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में शामिल हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
राहत और बचाव कार्य में जुटी सरकारें
नेपाल में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े लापता कर्मचारियों की संख्या 31 अगस्त 2026 तक 933 से घटकर 639 हो गई है। हालांकि, कम से कम 90 लोग अभी भी कई प्रोजेक्ट सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल यानी IPPAN इस राहत कार्य में लगातार मदद कर रहा है। नेपाल सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए 20,000 से अधिक खोज और बचाव कर्मियों को तैनात किया है, जिनमें नेपाल आर्मी, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स शामिल हैं। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है और फॉरेंसिक पहचान, सुरंगों को साफ करने तथा भारी-भरकम ड्रोनों के जरिए जरूरी सामान गिराने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और क्षेत्रीय अपडेट
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने 31 अगस्त को जानकारी दी कि करीब 65,000 लोगों को तुरंत पीने के पानी, साफ-सफाई और स्वच्छता संबंधी मदद की जरूरत है। इस बीच, चीन ने 1 सितंबर 2026 को तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया और उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें उसकी हाइड्रोपावर परियोजनाओं को बाढ़ के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। चीनी अधिकारियों ने इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण अटकलें करार दिया है। तिब्बती अधिकारियों ने फर्जी आपदा जानकारी फैलाने के आरोप में कम से कम 10 लोगों को सजा भी दी है। भारत भी इस मुश्किल समय में राहत कार्यों में पूरी मदद कर रहा है, जिसके तहत 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है और काठमांडू में एक विशेष फॉरेंसिक टीम भी मदद कर रही है। नेपाल में अब तक कुल 11,000 से ज्यादा लोगों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला जा चुका है।