एशिया-प्रशांत में तनाव, जापान की सैन्य तैनाती पर चीन ने जताया कड़ा विरोध

Praggya Singh sabal15 September 20264 min read18 viewsWorld
एशिया-प्रशांत में तनाव, जापान की सैन्य तैनाती पर चीन ने जताया कड़ा विरोध

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इन दिनों हालात काफी गर्म चल रहे हैं और इसी बीच जापान, अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर चीन ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। चीन का साफ कहना है कि जापान द्वारा लंबी दूरी के रणनीतिक हमलावर हथियारों की तैनाती से पूरे इलाके में हथियारों की होड़ बढ़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है और इससे सैन्य टकराव की आशंका भी लगातार बढ़ती जा रही है।

ओरिएंट शील्ड 26 सैन्य अभ्यास पर आपत्ति

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू और चीन के अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र 'चाइना डेली' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स इस समय अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के साथ मिलकर ‘ओरिएंट शील्ड 26’ नाम से बड़ा सैन्य अभ्यास कर रही है। यह सैन्य अभ्यास गत 8 सितंबर से 24 सितंबर तक जापान के होक्काइडो और कागोशिमा क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें तीनों देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।

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सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इस बार के इस सैन्य अभ्यास में पहली बार अमेरिका का टाइफॉन मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है। इस बात को लेकर बीजिंग का यहर कहना है कि इस तरह की खतरनाक हथियारों की तैनाती से क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ रही हैं। चीनी प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि तथाकथित ‘सुरक्षा कवच’ के नाम पर इस अभ्यास का पूरा इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलावर हथियारों की तैनाती को और आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, जिससे दूसरे देशों के वैध सुरक्षा हित सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।

रूस ने भी जताया कड़ा विरोध

केवल चीन ही नहीं बल्कि इस सैन्य अभ्यास को लेकर रूस की तरफ से भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। गत 31 अगस्त को रूस ने जापान में होने वाले इस पूरे अभ्यास के खिलाफ रूस स्थित जापानी दूतावास के सामने अपना औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने गत 1 सितंबर को स्पष्ट रूप से कहा था कि जापानी क्षेत्र में इस तरह के घातक हथियारों की तैनाती, भले ही वह किसी भी सैन्य अभ्यास के नाम पर की जा रही हो, सीधे तौर पर रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करेगी। उन्होंने मॉस्को के लिए इस स्थिति को पूरी तरह से “अस्वीकार्य” करार दिया और चेतावनी दी कि रूस अपनी रक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी जवाबी कदम उठाएगा।

चीन लंबे समय से कर रहा है विरोध

चीन पिछले काफी लंबे समय से एशियाई देशों की धरती पर अमेरिकी मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम की तैनाती का कड़ा विरोध करता आया है। इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने गत मई महीने में ही यह बात कही थी कि चीन टाइफॉन मिसाइल सिस्टम की तैनाती को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। गुओ ने टाइफॉन को एक खतरनाक रणनीतिक हमलावर हथियार बताते हुए साफ किया था कि इसकी तैनाती से क्षेत्रीय रणनीतिक सुरक्षा को भारी नुकसान पहुंच सकता है और इससे सैन्य टकराव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

शांतिवादी संविधान का उल्लंघन करने का आरोप

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने जापान पर यह भी आरोप लगाया कि वह लगातार लंबी दूरी के हमलावर हथियार विकसित कर रहा है और विदेशों में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेजी से बढ़ा रहा है। उनके मुताबिक जापान की ये तमाम गतिविधियां उसके अपने शांतिवादी संविधान और रक्षा-केंद्रित सुरक्षा नीति के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं। उन्होंने जापान के इस सैन्य विस्तार को “मिलिटरीवाद के एक नए रूप” की तरफ बढ़ता हुआ एक खतरनाक कदम करार दिया है।

जियांग ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चेतावनी दी कि जापान की इन बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने वाला कोई भी कदम पूरे क्षेत्र को एक खतरनाक भंवर में धकेल सकता है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान अंततः खुद जापान को ही उठाना पड़ेगा। चीन ने जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से यह अपील की है कि वे दूसरे देशों की सुरक्षा चिंताओं का पूरा सम्मान करें, अपनी नीतियों में सुधार लाएं और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाएं।

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