अमेरिका और ईरान फिर से इस्लामाबाद समझौते की ओर लौटें: चीन और ओमान की अपील
चीन और ओमान ने अमेरिका और ईरान से इस्लामाबाद समझौते के ढांचे में लौटने का आग्रह किया है ताकि संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।

मस्कट/बीजिंग: चीन और ओमान ने औपचारिक रूप से अमेरिका और ईरान से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के ढांचे में वापस लौटने का आग्रह किया है। दोनों देशों का मानना है कि राजनयिक बातचीत फिर से शुरू करने से मौजूदा संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं। इस्लामाबाद समझौता 17 जून 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित एक 14-सूत्रीय ढांचा था।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई शत्रुता को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की सुविधा प्रदान करना था। इसमें अंतिम समझौते के लिए बातचीत करने हेतु 60 दिनों की समय सीमा तय की गई थी।
हालांकि, अगस्त 2026 के मध्य में यह 60 दिनों की अवधि बिना किसी विस्तार के समाप्त हो गई, जिससे यह समझौता प्रभावी रूप से रुक गया। इसके बावजूद, क्षेत्रीय शक्तियां इस दस्तावेज़ को भविष्य की बातचीत के लिए एक आवश्यक आधार मान रही हैं।
इस मध्यस्थता प्रयास में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप प्रधानमंत्री इशाक डार के नेतृत्व के साथ-साथ कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र का भी सहयोग था। ओमान विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री प्रशासन से संबंधित परामर्शों के माध्यम से इसमें शामिल है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित अन्य अधिकारियों ने अक्टूबर 2026 के अंत तक यह स्पष्ट किया कि तेहरान के अनुसार आगे बढ़ने के लिए समझौते के बाद लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कम करना जरूरी है। तेहरान ने संकेत दिया है कि फिलहाल उसके पास वाशिंगटन के लिए कोई नया प्रस्ताव नहीं है।
समझौते की समय सीमा समाप्त होने से नियामक अनिश्चितता भी पैदा हो गई है। इसमें अमेरिकी ट्रेजरी के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा जारी 'जनरल लाइसेंस X' शामिल है, जिसे समझौते के प्रोत्साहन ढांचे के हिस्से के रूप में विशिष्ट ऊर्जा लेनदेन के लिए अधिकृत किया गया था।
शत्रुता को और बढ़ने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय नेता वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस्लामाबाद समझौते के सिद्धांतों पर जोर दे रहे हैं।