चीन का नेपाल को बड़ा प्रस्ताव: कोरोला नाका बन सकता है अंतरराष्ट्रीय सीमा

Gautam Sahu2 October 20262 min read0 viewsWorld
चीन का नेपाल को बड़ा प्रस्ताव: कोरोला नाका बन सकता है अंतरराष्ट्रीय सीमा

भारत के पड़ोसी देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच चीन ने नेपाल को एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रस्ताव सौंपा है। नेपाल और चीन के व्यापारिक रिश्तों को एक नया आयाम देने के लिए बीजिंग ने तिब्बत की सीमा से लगे मुस्तांग जिले के लोमान्थांग स्थित कोरोला नाके को एक साल के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा नाका बनाने की पहल की है। समुद्र तल से करीब 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

क्यों पड़ी कोरोला नाके की जरूरत?

हाल ही में प्राकृतिक आपदाओं के कारण नेपाल और चीन के बीच पारंपरिक व्यापारिक मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा है। गत 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने रसुवागढ़ी–केरुंग सीमा क्षेत्र के सभी बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया था। इसके अलावा म्याग्दी में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण नेपाल की ओर से आवाजाही बाधित हुई है। इन मुश्किल हालात के बीच पिछले कुछ समय से कोरोला नाके का इस्तेमाल वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया जा रहा है।

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चीन की तैयारी और नेपाल की प्रतिक्रिया

चीन ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय के माध्यम से नेपाल के भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजा है। चीनी पक्ष ने अपनी तरफ आव्रजन, कस्टम और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे पहले ही तैयार कर लिए हैं। वहीं, नेपाल की तरफ अभी कस्टम, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हालांकि, चीन ने नेपाल की जरूरत के अनुसार सीमा क्षेत्र में आवश्यक ढांचे के निर्माण में पूरा सहयोग करने का भरोसा भी दिया है। नेपाली अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का गर्मजोशी से स्वागत किया है और इसे स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

व्यापार और आवाजाही को मिलेगा विस्तार

फिलहाल नेपाल और चीन के बीच तातोपानी–झांगमु नाका, रसुवागढ़ी–केरुंग नाका और हिल्सा–पुरांग नाका बतौर तीन अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके संचालित हैं। इसके अलावा करीब 14 पारंपरिक नाके हैं, जिनमें कोरोला भी शामिल है। पारंपरिक नाके के नियम के तहत अभी सिर्फ मुस्तांग और तिब्बत के स्थानीय लोगों को ही सीमा से 30 किलोमीटर के दायरे में व्यापार की अनुमति मिलती है। यदि कोरोला को एक साल के लिए अंतरराष्ट्रीय नाके का दर्जा मिल जाता है, तो देश के अन्य हिस्सों से आने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों के लिए भी रास्ते खुल जाएंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।

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