चीन का बड़ा बयान, अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया कानून के खिलाफ और यूएन का नहीं है अधिकार.

चीन ने अमेरिकी संसद द्वारा रूसी ऊर्जा आयात पर लगाए जाने वाले नए प्रतिबंधों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के पूरी तरह खिलाफ बताया है। बीजिंग स्थित चीनी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि इस तरह के एकतरफा आर्थिक दबाव और लॉन्ग-आम ज्यूरिस्डिक्शन का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब अमेरिका में एक नया कानून पास किया गया जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही गई है।
नया अमेरिकी कानून और रूसी ऊर्जा पर शिकंजा
अमेरिकी संसद ने हाल ही में रूस के खिलाफ एक बड़ा प्रतिबंध विधेयक पास किया है, जिसे अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। इस नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ या जुर्माना लगा सकें जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं। इस सूची में भारत और चीन जैसे बड़े देशों के नाम भी शामिल किए गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में यह बिल 262 वोटों से पास हुआ जबकि 159 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट किया था। सीनेट ने इसे पहले ही 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी थी।
चीन का कड़ा रुख और द्विपक्षीय व्यापार का बचाव
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि चीन और अन्य देशों के बीच होने वाला सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पूरी तरह स्वतंत्र है। यह किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाता है और इस पर किसी भी बाहरी ताकत का दबाव नहीं होना चाहिए। चीनी मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ऐसे प्रतिबंधों के पीछे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई अनिवार्य आदेश भी नहीं है, इसलिए इसे दुनिया पर थोपा नहीं जा सकता। अमेरिका के इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।