सऊदी अरब की अपील पर चीन ने ईरान से की बात, रेड सी पर हूती कब्ज़े के बाद मची हलचल.

लाल सागर के तटीय इलाकों पर हूती विद्रोहियों के अचानक हुए बड़े हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। 11 सितंबर से 14 सितंबर 2026 के बीच चले सैन्य अभियान में इन विद्रोहियों ने यमन के पूरे रेड सी कोस्ट और कई खास द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सऊदी अरब ने अब चीन से मदद मांगी है ताकि इस तनाव को कम किया जा सके और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके।
चीन की दखल और ईरान का जवाब
17 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने निजी तौर पर ईरान से संपर्क किया है। चीन ने ईरान से कहा है कि वह हूती विद्रोहियों पर अपना असर डाले ताकि इलाके में शांति बनी रहे और आगे कोई बड़ा संकट पैदा न हो। इस पर ईरान ने साफ कहा है कि इस क्षेत्र में शांति तभी संभव है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा पुराना विवाद खत्म होगा। यमन के गृह मंत्री मेजर जनरल इब्राहिम हाइडान ने भी 17 सितंबर को चेतावनी देते हुए बताया कि तेहरान समर्थित ताकतें हूती विद्रोहियों के जरिए बब अल-मदब स्ट्रेट इलाके को सैन्य अड्डे के रूप में बदलने की कोशिश कर रही हैं।
अमेरिका का सीधा रुख और ओमान में बैठक
दूसरी तरफ, अमेरिका ने सऊदी अरब की सीधी सैन्य मदद करने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने 13-14 सितंबर 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में हूती नेताओं के साथ सीधी बैठक की थी। इन गुप्त बैठकों में हूती प्रतिनिधियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया कि उनका 2025 का युद्धविराम समझौता अभी भी लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर बाकी सभी कमर्शियल जहाजों के लिए समुद्री रास्ता पूरी तरह से सुरक्षित है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार, 15 सितंबर 2026 को हूतियों के साथ सीधी बातचीत की पुष्टि की। अमेरिकी सरकार ने यह भी कहा कि ईरान के साथ पहले से चल रहे संघर्ष के कारण उनके पास संसाधनों की कमी है, इसलिए वे इस मामले में सीधे सैन्य दखल नहीं देंगे।
सऊदी अरब की नई रणनीति और सुरक्षा की तलाश
हूती विद्रोहियों द्वारा बब अल-मदब स्ट्रेट पर कब्जा किए जाने के बाद सऊदी अरब के पास एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक कम होने लगा है। इस कमी को पूरा करने के लिए सऊदी सरकार अब फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देशों से एयर-डिफेंस सहायता मांग रही है। जानकारों का मानना है कि हूतियों के हाथ में इस समुद्री रास्ते के जाने से ईरान को वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग लेन पर बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा मिल गया है, जो बिल्कुल होर्मुज स्ट्रेट जैसा असर रखता है। इस पूरे घटनाक्रम से Gulf देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है, क्योंकि इसका सीधा असर व्यापार और आने वाले दिनों में सुरक्षा पर पड़ सकता है।