संयुक्त राष्ट्र में चीन ने मध्य पूर्व की संप्रभुता पर दिया जोर, अमेरिका और इसराइल पर साधा निशाना

चीन के उपराष्ट्रपति Han Zheng ने न्यूयार्क में आयोजित 81st United Nations General Assembly के सत्र को संबोधित किया। शनिवार, 26 सितंबर 2026 को दिए गए इस भाषण में उन्होंने मध्य पूर्व के देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों की यह सीधी जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की पुरानी शीत युद्ध वाली मानसिकता को पूरी तरह से छोड़ दें।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर
अपने संबोधन के दौरान चीनी नेता ने आपसी विवादों को बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के जरिए सुलझाने की बात कही। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना किए जाने वाले एकतरफा सैन्य एक्शन का कड़ा विरोध किया। इस बयान को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों पर एक बड़ा कटाक्ष माना जा रहा है। इस समय ईरान में चल रहे संघर्ष और क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच उन्होंने सभी संबंधित देशों से बल प्रयोग की धमकियों को रोकने और प्रतिबंध हटाने की अपील की है।
फिलीस्तीन मुद्दे पर चीन का रुख
फिलीस्तीन संघर्ष के बारे में बात करते हुए Han Zheng ने बीजिंग की पुरानी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने फिलीस्तीन के लिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने वेस्ट बैंक में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए एक खास ढांचा तैयार करने की बात कही ताकि फिलीस्तीनी लोग खुद अपने इलाके पर शासन कर सकें।
व्यापार मार्गों और वैश्विक स्थिरता की बात
दुनियाभर में स्थिरता की बात करते हुए उन्होंने सुरक्षित व्यापार मार्गों, औद्योगिक नेटवर्क और सप्लाई चेन को बनाए रखने को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया का हर देश चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बराबर का हिस्सा है। वैश्विक शासन आपसी सहमति और सम्मान के आधार पर ही चलना चाहिए। यह भाषण अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच वाशिंगटन में हुई हालिया बैठक के बाद आया है। इस दौरान ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi और सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने भी क्षेत्र में तनाव कम करने की बात कही थी।