यमन के विस्थापन शिविरों में तेजी से फैल रहा है हैजा, हजारों लोग संक्रमित और बच्चों पर मंडरा रहा खतरा

यमन: देश में विस्थापन के संकट के बीच हैजा तेजी से पैर पसार रहा है। भीड़भाड़ वाले शिविरों में साफ पानी और स्वच्छता की कमी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है। इस्लामिक रिलीफ के एक्टिंग कंट्री डायरेक्टर सईद सईद उमर ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति एक आपदा जैसी है।
सईद उमर ने अल जजीरा को बताया कि बच्चे और गर्भवती महिलाएं इस संकट में सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह बीमारी 24 घंटे के भीतर जानलेवा साबित हो सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 तक यमन में इस साल हैजा के 8,034 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 2,000 मामले पिछले चार हफ्तों के दौरान सामने आए हैं। हाल के मामलों में से 94 प्रतिशत अब्यान, लहज, अल-धालि, ताइज़ और अदन के दक्षिणी प्रांतों में केंद्रित हैं।
यह प्रकोप ऐसे समय में बढ़ा है जब 6 अगस्त 2026 से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें से कई लोग स्कूलों, मस्जिदों और भीड़भाड़ वाले शिविरों में रह रहे हैं। यहाँ करीब 40 प्रतिशत लोगों के पास सुरक्षित पानी नहीं है और एक तिहाई लोगों के पास पर्याप्त शौचालयों की सुविधा नहीं है।
WHO की क्षेत्रीय आपातकालीन निदेशक डॉ. एनेट हेनज़ेलमैन ने कहा कि अगर तुरंत फंड और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ टीकाकरण की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह प्रकोप कमजोर समुदायों को खतरे में डालता रहेगा। यमन की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी खराब स्थिति में है, जहाँ केवल 60 प्रतिशत सुविधाएं पूरी तरह काम कर रही हैं। नौ प्रांतों के 500 स्वास्थ्य केंद्रों को बाहरी सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यमन के सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के साथ निगरानी बढ़ाने पर काम कर रहा है। हालांकि, आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए जरूरी 31 मिलियन अमेरिकी डॉलर के फंड में से अब तक केवल 4.3 मिलियन डॉलर ही जुट पाए हैं।
दूसरी ओर, इस्लामिक रिलीफ ताइज़, लहज और अदन के अस्पतालों के लिए दवाइयां और जरूरी सामान जुटाने में लगा है। इसके साथ ही बच्चों को खसरे का खतरा भी है, जिसके इस साल 22,800 संदिग्ध मामले और 128 मौतें हुई हैं। यहाँ टीकाकरण की दर केवल 45 प्रतिशत है।