कतर में अमेरिकी बेस पर एंट्री बैन: सीनेटर क्रिस मर्फी ने रक्षा विभाग पर लगाया कवर-अप का आरोप

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsWorld
कतर में अमेरिकी बेस पर एंट्री बैन: सीनेटर क्रिस मर्फी ने रक्षा विभाग पर लगाया कवर-अप का आरोप

अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मर्फी का दावा है कि रक्षा विभाग ईरान के साथ चल रहे युद्ध के प्रभावों को कांग्रेस और आम जनता से छिपाने के लिए एक "सक्रिय और असंवैधानिक प्रयास" कर रहा है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सीनेटर को कतर स्थित अल उदेद एयर बेस (Al Udeid Air Base) जाने से रोक दिया गया।

बता दें कि अल उदेद एयर बेस इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है और खबरों के मुताबिक यह ईरानी हमलों का एक संभावित लक्ष्य भी रहा है। सीनेटर मर्फी, जो सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्य हैं, ने कहा कि उन्होंने पहले भी एक दर्जन से अधिक बार मध्य पूर्व की यात्रा की है और उन्हें कभी ऐसी समस्या नहीं आई। लेकिन इस बार उन्हें न केवल बेस पर जाने से रोका गया, बल्कि उनकी सैन्य ब्रीफिंग की मांग को भी खारिज कर दिया गया।

पेंटागन और सीनेटर के बीच तकरार

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सीनेटर मर्फी ने इस पाबंदी के लिए रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मर्फी के कार्यालय को उनकी यात्रा से पहले ही सूचित कर दिया गया था कि उन्हें बेस एक्सेस के लिए सहायता नहीं दी जाएगी। रक्षा विभाग के अनुसार, यह निर्णय सचिव हेगसेथ द्वारा 3 मार्च, 2026 को जारी क्षेत्रीय यात्रा प्रतिबंधों के निर्देशों के तहत लिया गया था और यह नीति सभी पर समान रूप से लागू है।

इस घटना ने अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के बीच एक गहरी दरार को भी उजागर किया है। जहां रक्षा विभाग ने उन्हें रोका, वहीं अमेरिकी विदेश विभाग ने इस यात्रा का समर्थन किया था। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कतरी अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जैसे क्षेत्रीय नेताओं के साथ उनकी बैठकों में मदद की थी।

इस अपमानजनक अनुभव के बाद, सीनेटर क्रिस मर्फी ने अब कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह एक नया कानून (Legislation) तैयार करेंगे, जो रक्षा विभाग के लिए यह अनिवार्य बना देगा कि वह किसी भी परिस्थिति में कांग्रेस सदस्यों को विदेशी सैन्य ठिकानों तक पहुंचने की अनुमति दे और उनके साथ सहयोग करे।

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