अमेरिका ने रूस को दी कड़ी चेतावनी, सीआईए प्रमुख की गुप्त यात्रा से खुली मॉस्को की पोल

अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने रूस की राजधानी मॉस्को की एक गुप्त यात्रा की है। इस गुप्त दौरे का मुख्य उद्देश्य रूस को उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी NATO के सदस्य देशों पर किसी भी तरह का हमला न करने की कड़ी चेतावनी देना था। अमेरिकी खुफिया विभाग को लगातार यह आशंका सता रही थी कि रूस नाटो की ताकत और उसकी सहनशीलता की परीक्षा लेने की कोशिश कर सकता है, जिसके बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
गुप्त यात्रा और ईरान का मुद्दा
CBS न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त दौरे के दौरान सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को के अधिकारियों के सामने ईरान का संवेदनशील मुद्दा भी उठाया। उन्होंने रूस को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग ट्रैफिक यानी जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से नहीं खोला गया, तो रूस और ईरान दोनों पर और अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मॉस्को का यह दौरा मंगलवार को तब सार्वजनिक हुआ जब मॉस्को एयरपोर्ट पर अमेरिकी वायु सेना का एक विशेष जेट देखा गया और शहर के बीचों-बीच एक राजनयिक काफिला गुजरते हुए नजर आया। एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि यूक्रेन को पहले ही बता दिया गया था कि अमेरिका का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मॉस्को आने वाला है और उनसे यह अनुरोध किया गया था कि इस दौरे के दौरान वे किसी भी तरह का हमला या सैन्य कार्रवाई न करें।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक रेडियो होस्ट ग्लेन बेक के साथ बातचीत के दौरान इस गुप्त दौरे की पूरी पुष्टि की। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया कि इस यात्रा का ईरान के मुद्दे या नाटो की परीक्षा लेने की रूसी मंशा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इसे एक सामान्य दौरा करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी उम्मीद जताई कि इस यात्रा से कुछ सकारात्मक नतीजे जरूर निकल सकते हैं। ट्रंप ने इस दौरान यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे लंबे युद्ध को समाप्त करने की अपनी पुरानी कोशिशों की ओर भी इशारा किया।
क्रेमलिन और रूसी अधिकारियों की प्रतिक्रिया
रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मॉस्को में पत्रकारों को जानकारी दी कि सीआईए प्रमुख रैटक्लिफ ने रूसी खुफिया विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की, लेकिन उनकी मुलाकात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से नहीं हुई। इस महीने की शुरुआत में आई एक खुफिया रिपोर्ट में यह अंदेशा जताया गया था कि राष्ट्रपति पुतिन नाटो देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई तरह की उकसावे वाली हरकतें कर सकते हैं। इन हरकतों में मुख्य रूप से साइबर हमले, हाइब्रिड कार्रवाई और अन्य गुप्त अभियान शामिल बताए गए हैं, हालांकि ये अभी पारंपरिक पूर्ण सैन्य युद्ध के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
नाटो देशों की चिंता और हालिया घटनाएं
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में रूस की तरफ से उठाए गए कुछ कदमों ने पश्चिमी देशों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। इनमें रोमानिया की सीमा में ड्रोन का घुसना, पिछले महीने पोलैंड के हवाई क्षेत्र में एक रूसी मिसाइल का पहुंचना और पूरे यूरोप में कथित तौर पर तोड़फोड़ तथा साइबर हमलों की बढ़ती घटनाएं शामिल हैं। नाटो संगठन के नियमों के अनुसार, यदि किसी एक भी सदस्य देश पर हमला होता है, तो गठबंधन के सभी देश उसकी रक्षा के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरते हैं। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के भीषण आतंकी हमलों के बाद सभी पश्चिमी देशों ने ऐसी ही एकजुटता दिखाई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाटो की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं तथा इसके सदस्य देशों की खुलकर आलोचना भी करते आए हैं।