भारत में सीएनजी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के महंगे होने से आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें

भारतीय वाहन चालकों के लिए अपनी रोजमर्रा की यात्रा का खर्च उठाना काफी मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि बाजार में लगातार सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन भी आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर बने हुए हैं। पेट्रोल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण लगातार अस्थिरता बनी हुई है, जिसके चलते जिन लोगों ने पहले कम खर्च के लिए सीएनजी गाड़ियों का रुख किया था, उन्हें अब पारंपरिक ईंधन के बराबर ही पैसे चुकाने पड़ रहे हैं और इसके अलावा रीफिलिंग स्टेशनों पर लंबी कतारों का सामना भी करना पड़ रहा है।
सीएनजी की कीमतों में भारी उछाल और आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर 2026 तक देश भर में सीएनजी की औसत कीमत ₹86.00 प्रति किलोग्राम बनी हुई है। इस स्थिति से पहले साल की शुरुआत में ही कई बड़े दाम बढ़ाए जा चुके हैं, जिसमें 29 अगस्त 2026 को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL द्वारा दिल्ली-एनसीआर में ₹3.89 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी शामिल है, जिसके बाद वहां स्थानीय दरें बढ़कर ₹86.98 प्रति किलोग्राम हो गईं। इसके अलावा महानगर गैस लिमिटेड यानी MGL ने 30 मई 2026 को ₹2 प्रति किलोग्राम की दरें बढ़ाई थीं, जिससे मुंबई महानगर क्षेत्र में कीमतें सीधे ₹86 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं।
IGL के अधिकारियों ने इन बढ़ती कीमतों के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहे गंभीर संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी के आने-जाने पर पड़ने वाले असर को मुख्य वजह बताया है, जिसके कारण वैश्विक एलएनजी की लागत इस संकट से पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है। इस बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 अगस्त 2026 को संपीड़ित बायो-गैस यानी CBG की संशोधित खरीद कीमतों को लेकर चिंता जताई और कहा कि आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ को सीमित रखा जाएगा। वहीं वैकल्पिक ईंधन के मोर्चे पर सरकार एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है, जिसके तहत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 14 जून 2026 को 100% एथेनॉल के इस्तेमाल के नियमों को मंजूरी दी और प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 9 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि सरकार ई-20 सम्मिश्रण लक्ष्यों का विस्तार कर रही है। इस पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप NewsOnAir की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों की ऊंची कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर
हर तरफ हरी ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी बजट को ध्यान में रखने वाले आम खरीदार की पहुंच से बहुत दूर हैं। बाजार में बिकने वाली लोकप्रिय गाड़ियां जैसे टाटा पंच ईवी जिसकी शुरुआती कीमत ₹8.16 लाख है, टाटा नेक्सन ईवी जिसकी शुरुआती कीमत ₹12.49 लाख है, और महिंद्रा एक्सयूवी400 जिसकी शुरुआती कीमत ₹15.49 लाख है, ये सभी चार लाख रुपये के बजट से बहुत ज्यादा महंगी हैं।
कम बजट वाली गाड़ियों पर लोगों का भरोसा
इन तमाम महंगी गाड़ियों की वजह से अब बहुत से उपभोक्ता केवल कुछ चुनिंदा इंटरनल कॉम्बशन इंजन वाली गाड़ियों को ही अपने लिए सही विकल्प मान रहे हैं। मारुति सुजुकी की ऑल्टो के10 गाड़ी, जिसकी कीमत ₹3.70 लाख से ₹5.45 लाख के बीच है, और ऑल्टो टूर एच1 गाड़ी, जिसकी कीमत ₹4 लाख से ₹4.82 लाख के बीच है, उन लोगों के लिए पहली पसंद बनी हुई हैं जो कम दाम में ज्यादा माइलेज चाहते हैं। इसके अलावा पिछली पीढ़ी की ऑल्टो 800 गाड़ी पेट्रोल पर 22.05 किलोमीटर प्रति लीटर और सीएनजी पर 31.59 किलोमीटर प्रति किलोग्राम का शानदार माइलेज देती थी, जिसने बजट सेगमेंट में इसे सबसे भरोसेमंद गाड़ी बना दिया था।