यरूशलेम में कोलंबिया द्वारा दूतावास खोलने के फैसले की सऊदी अरब और 18 अन्य देशों ने की कड़ी निंदा

रियाद: सऊदी अरब और 18 अन्य अरब और इस्लामिक देशों ने यरूशलेम में कोलंबिया द्वारा दूतावास खोलने के फैसले पर गहरा विरोध जताया है। 16 अक्टूबर 2026 को इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी कर इस कदम की कड़ी निंदा की है।
कोलंबिया ने 14 अक्टूबर 2026 को यरूशलेम में अपने राजनयिक मिशन की आधिकारिक शुरुआत की थी। इस उद्घाटन समारोह में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार और कोलंबिया के विदेश मंत्री ओमर बुला एस्कोबार शामिल हुए थे।
यह कदम कोलंबिया की नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है। इससे पहले गाजा संघर्ष के दौरान कोलंबिया की पिछली सरकार ने इजरायल के साथ अपने संबंधों को निलंबित कर दिया था।
सऊदी अरब, फिलिस्तीन, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, अल्जीरिया, जिबूती, सूडान, सीरिया, सोमालिया, ओमान, कतर, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मिस्र और यमन के इस समूह ने कहा कि यह फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 476 और 478 का उल्लंघन है। इन प्रस्तावों के मुताबिक यरूशलेम की कानूनी या ऐतिहासिक स्थिति को बदलने की किसी भी कोशिश को खारिज किया गया है और वहां से राजनयिक मिशनों को हटाने की बात कही गई है।
विदेश मंत्रियों ने अपने बयान में साफ किया कि यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने या इसके कानूनी स्वरूप को बदलने वाला कोई भी कदम शून्य और अवैध है। उन्होंने कोलंबिया सरकार से इस फैसले को वापस लेने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है।
बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि कोलंबिया का यह कदम टू-स्टेट सॉल्यूशन की कोशिशों को कमजोर करता है। इससे पूर्वी यरूशलेम को राजधानी बनाकर एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य बनाने के अधिकार पर बुरा असर पड़ेगा।
यह राजनयिक तनाव ऐसे समय में आया है जब कोलंबिया ने 13 अक्टूबर 2026 को इजरायल के साथ मुक्त व्यापार समझौते को फिर से बहाल किया है। कोलंबियाई अधिकारियों ने इस कदम को एक प्रमुख रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला बताया है।