अमेरिका में मौत की सजा पाने वाली महिला पर नहीं हुआ इंजेक्शन का असर, बच गई जान

अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मौत की सजा पाने वाली एक महिला पर जानलेवा इंजेक्शन का कोई असर नहीं हुआ। क्रिस्टा गेल पाइक नाम की इस महिला को मारने की कोशिश पूरी तरह नाकाम रही। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें मौत देने के लिए पेंटोबार्बिटल की दो डोज़ दी गई थीं, लेकिन आखिरी डोज़ दिए जाने के 40 मिनट बाद भी वह जीवित थीं।
क्या है पूरा मामला?
यह हैरान करने वाली घटना टेनेसी के नैशविल स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में घटी। क्रिस्टा गेल पाइक को 1995 में एक 19 वर्षीय महिला की हत्या का दोषी पाया गया था। उन्हें मौत की सजा दी जा रही थी, लेकिन प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको स्तब्ध कर दिया।
पाइक के वकील के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जब इंजेक्शन दिया जा रहा था, तब गवाहों को वहां से हटा दिया गया था। इसके बाद टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ़ करेक्शंस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि पाइक की जान बच गई है।
इतिहास में पहली बार हुई ऐसी घटना
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रॉबिन माहेर ने इस घटना को बेहद अनोखा और बेमिसाल बताया है। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जहाँ मौत की सजा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा देने के बाद कोई जीवित बच गया हो। टेनेसी के इतिहास में पाइक 200 से अधिक वर्षों में मौत की सजा पाने वाली पहली महिला बनने वाली थीं।
टेनेसी सरकार का बड़ा फैसला
इस घटना के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आदेश दिया है कि साल के अंत तक मौत की सजा देने की पूरी प्रक्रिया को रोक दिया जाए।
गवर्नर ने अपने बयान में कहा कि:
"कानूनी रूप से दी जाने वाली सजा को लागू करना राज्य की सबसे गंभीर जिम्मेदारियों में से एक है। टेनेसी के नागरिक उम्मीद करते हैं कि यह काम न केवल कानूनी और संवैधानिक रूप से सही हो, बल्कि पूरी तरह से असरदार भी हो।"
गौरतलब है कि इस सजा को लागू करने से पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजक की अपील पर रोक हटा दी थी, जिसके बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब इस विफल निष्पादन के बाद राज्य की पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।