होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के जोखिम से कच्चे तेल की शिपिंग लागत सात गुना बढ़ी, रिफाइनरियों के मुनाफे पर पड़ेगा असर
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में युद्ध जोखिम से कच्चे तेल की शिपिंग लागत सात गुना बढ़ गई है, जिससे रिफाइनरियों का मुनाफा घटेगा।

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध से जुड़े जोखिम और जहाजों के बीच तेल ट्रांसफर की बढ़ती गतिविधियों की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की शिपिंग लागत में भारी उछाल आया है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कच्चे तेल की मालभाड़ा दरें एक साल पहले के मुकाबले सात गुना बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक औसत मालभाड़ा दर, जो एक साल पहले 3 डॉलर प्रति बैरल थी, अब बढ़कर 20 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी की शुरुआत मिडिल ईस्ट के रूटों और बहुत बड़े कच्चे तेल के जहाजों (VLCC) से हुई थी, लेकिन अब यह असर सभी प्रमुख ट्रेडिंग रूटों पर दिख रहा है। लंबी दूरी की यात्राओं पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
गोल्डमैन सैक्स ने मालभाड़ा दरों में हुई इस 20 डॉलर की वृद्धि के पीछे पांच मुख्य कारण बताए हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के लिए 7 डॉलर का वॉर रिस्क प्रीमियम, फारस की खाड़ी के बाहर जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के लिए 4 डॉलर, समुद्री ईंधन की बढ़ी कीमतों के लिए 4 डॉलर, टैंकरों के गलत आवंटन और डायवर्जन के लिए 3 डॉलर और ईरानी टैंकर बेड़े पर प्रतिबंधों के लिए 2 डॉलर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब तक मिडिल ईस्ट में संघर्ष जारी रहेगा, मालभाड़ा दरें इसी तरह बनी रह सकती हैं।
शिपिंग लागत में इस बढ़ोतरी का सीधा दबाव रिफाइनरियों पर पड़ रहा है, खासकर एशिया में जहां दूरदराज के देशों से कच्चे तेल का आयात किया जाता है। इन रिफाइनरियों के पास अब दो विकल्प हैं; या तो वे इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालें या फिर कम मुनाफे के साथ काम करें। हालांकि, चीन जैसे बाजारों में जहां इलेक्ट्रिक वाहनों का विकल्प मौजूद है या जहां ईंधन की कीमतें सरकार तय करती है, वहां लागत बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
इस स्थिति के कारण रिफाइनरियों का मुनाफा घट सकता है, जिससे रिफाइंड ईंधन का उत्पादन कम हो सकता है और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। वहीं, दूरदराज के बाजारों में तेल बेचने वाले उत्पादकों को अपनी मांग बनाए रखने के लिए कीमतों में ज्यादा छूट देनी पड़ सकती है। इसके उलट, खपत केंद्रों के करीब स्थित आपूर्तिकर्ताओं, जैसे उत्तर-पश्चिमी यूरोप के ब्रेंट और रूस के ईएसपीओ को फायदा मिल सकता है।
टैंकरों के संचालन खर्च में भी वृद्धि हुई है, जिसका कारण क्रू की बढ़ती सैलरी और बंकर ईंधन की कीमतें हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फारस की खाड़ी और रूस से कम निर्यात और टैंकरों व कंटेनर जहाजों की मजबूत मांग के कारण वैश्विक समुद्री ईंधन की कीमतें एक साल में लगभग 70 प्रतिशत या 50 डॉलर प्रति बैरल बढ़ गई हैं। इस बीच, ब्रेंट क्रूड इस हफ्ते 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और रिपोर्ट के समय यह करीब 111.51 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि एक अन्य बेंचमार्क करीब 99.31 डॉलर पर था।