चक्रवात अर्नब ने भारत और नेपाल में मचाई तबाही, लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर
चक्रवात अर्नब ने भारत के पूर्वी तट पर भारी तबाही मचाई है, जिससे कई मौतें हुई हैं और नेपाल में ट्रेकिंग रोक दी गई है।

विशाखापट्टनम: चक्रवात अर्नब ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को तड़के 2 बजे से 8 बजे के बीच भारत के पूर्वी तट पर दस्तक दी। यह 'अति गंभीर' चक्रवाती तूफान बापटला और विशाखापट्टनम के बीच यनम के पास तट से टकराया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इस दौरान हवा की रफ्तार 125-135 किमी प्रति घंटा रही, जबकि झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुंचे।
तूफान के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र से 1.80 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इनमें आंध्र प्रदेश के कम से कम 89 हजार और ओडिशा के 30 हजार से अधिक लोग शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि इस आपदा में तीन लोगों की जान चली गई है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य के 714 गांव प्रभावित हुए हैं और 31 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। 20 जिलों में 2,000 चक्रवात आश्रय स्थलों को सक्रिय किया गया है। काकीनाडा में बाढ़ के पानी से चार लोगों को बचाया गया, जबकि कोनासीमा-काकीनाडा तट के पास मार्शल आइलैंड्स का एक कार्गो जहाज 'सिग्मा पर्ल' फंस गया है।
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि राज्य के दक्षिणी जिलों, खासकर मलकानगिरी में तूफान का बड़ा असर दिखा है। विशाखापट्टनम के बीच रोड और सीथम्माधरा जैसे इलाकों में पेड़ गिरने से सड़कें जाम हो गईं। काकीनाडा में बिजली गुल रही और अनाकापल्ली व विशाखापट्टनम जिलों में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई।
परिवहन पर भी इसका बुरा असर पड़ा और भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनें रद्द कर दीं। रद्द की गई सेवाओं में पारादीप-कटक-पारादीप पैसेंजर, भुवनेश्वर-ब्रह्मपुर-भुवनेश्वर MEMU, कटक-पालास MEMU और पालास-कटक MEMU शामिल हैं। झारखंड के रांची, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा जिलों में 29 अक्टूबर तक स्कूल बंद रखे गए, जबकि पश्चिम बंगाल के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया।
तूफान का असर भारत के बाहर भी देखा गया। नेपाल के आव्रजन विभाग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने 29 से 31 अक्टूबर तक पहाड़ी ट्रेकिंग पर रोक लगा दी है। हिमालय की ओर बढ़ते तूफान के कारण भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा है। मुस्तांग जिले के अधिकारियों ने पर्यटकों को ऊंचाई वाले इलाकों में न जाने की सलाह दी है। इसके अलावा, श्रीलंका ने भी अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के डर से स्कूलों को बंद कर दिया है।