दालबंदीन चेकपोस्ट पर बलोच किसान की मौत, BYC ने मांगी जांच

बलूचिस्तान के दालबंदीन में एक सैन्य चौकी पर हुई फायरिंग ने एक गरीब परिवार का सहारा छीन लिया। रिपोर्टों के मुताबिक दालबंदीन चेकपोस्ट पर पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों की गोलीबारी में 28 साल के एक किसान की मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ। यह जानकारी द बलूचिस्तान पोस्ट के हवाले से सामने आई है।
बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने मृतक की पहचान यासीन बलोच के रूप में की है। वह मुहम्मद गौस के बेटे थे और दालबंदीन की ज़हूर कॉलोनी में रहते थे। कमेटी के अनुसार उनके साथ मौजूद सामी नाम का शख्स गोलीबारी में घायल हुआ है।
दो बहनों का इकलौता सहारा चला गया
BYC का कहना है कि यासीन अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। माता-पिता दोनों का पहले ही निधन हो चुका था। घर में कमाने वाले वही अकेले थे। अब उनकी दो बहनों के सामने रोज़ी-रोटी और सहारे, दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
कमेटी ने फायरिंग की निंदा करते हुए इसे बलूचिस्तान में आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा के बड़े सिलसिले की कड़ी बताया। उसका आरोप है कि सुरक्षा बलों के नियंत्रण वाले इलाकों से गुजरते वक्त भी लोग उत्पीड़न और जानलेवा बल प्रयोग के खतरे में रहते हैं। BYC के मुताबिक सुरक्षा के नाम पर लगाई गई सैन्य चौकियां धीरे-धीरे डराने, अपमानित करने और हिंसा करने की जगह बनती जा रही हैं। उसका यह भी कहना है कि बिना जवाबदेही के बल प्रयोग से इलाके के बलोच लोगों में डर का माहौल है।
इन आरोपों पर पाकिस्तानी सेना या प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई, यह उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं है।
BYC ने दालबंदीन की घटना को पंजगूर जिले में 3 अक्टूबर को हुई एक और घटना से भी जोड़ा। गोवारगो के फतेह अली बाजार में दो बच्चों की मौत हुई और तीन अन्य घायल हुए थे। स्थानीय सूत्रों ने शुरुआत में बताया कि बच्चों के खेलने के दौरान पेड़ से लटकी एक संदिग्ध चीज़ में धमाका हुआ। बाद में उनका आरोप था कि उस उपकरण में विस्फोटक था, जो पाकिस्तानी सेना के क्वाडकॉप्टर से जुड़ा था। BYC ने इसे "सामूहिक सज़ा और सरकारी आतंकवाद" करार दिया है।
कमेटी का कहना है कि दोनों घटनाएं प्रांत में आम लोगों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं को दिखाती हैं। यासीन की मौत पर वह जांच की मांग कर रही है।