यमन में सैन्य अभियान का दूसरा महीना शुरू, जंग से 3 लाख से ज्यादा लोग बेघर
यमन सरकार के 'डॉन ऑफ यमन' अभियान को एक महीना पूरा हुआ, लेकिन ताइज़ में हमले और विस्थापन से मानवीय संकट गहरा गया है।

सना: यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार द्वारा शुरू किए गए 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान को 5 नवंबर 2026 को एक महीना पूरा हो गया। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी के नेतृत्व में यह अभियान 5 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना है, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है, जिस पर 2014 से हूतियों का नियंत्रण है।
इस सैन्य अभियान को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन से व्यापक हवाई और लॉजिस्टिक सहायता मिल रही है। इसके साथ ही इसमें 'सदर्न जायंट्स ब्रिगेड्स' और 'नेशन्स शील्ड फोर्सेज' जैसे सहयोगी बल भी शामिल हैं। वर्तमान में ताइज़ और अल-जौफ प्रांतों में भारी लड़ाई जारी है। सरकारी बलों ने अल-जौफ में रणनीतिक पर्वत श्रृंखलाओं पर कब्जा करने और ताइज़ में हूती किलों पर ड्रोन व हवाई हमलों के जरिए जमीनी अभियान चलाने का दावा किया है।
हिंसा के बीच 6 नवंबर को ताइज़ के अल-वज़िया जिले में अल-हदारा बाजार पर एक बड़ा हमला हुआ, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। यमनी सरकार ने इसके लिए हूतियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि हूतियों ने इस तबाही का आरोप सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों पर लगाया है।
लगातार जारी संघर्ष के कारण मानवीय स्थिति गंभीर होती जा रही है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, हालिया तनाव की वजह से 3,23,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। ताइज़ में करीब 8 लाख निवासी ऐसे हैं जिन्हें सहायता सामग्री नहीं मिल पा रही है।
ताइज़ के स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वहां 40 प्रतिशत चिकित्सा सुविधाएं बंद हो चुकी हैं। जो अस्पताल अभी भी काम कर रहे हैं, वे ईंधन की भारी कमी से जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्रोतों के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 से शुरू हुए इस व्यापक तनाव में अब तक हजारों लोग हताहत हो चुके हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि सरकार फिलहाल बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियां चलाने में सक्षम है, लेकिन इस संघर्ष का जल्द खत्म होना मुश्किल नजर आता है।