यमन के राष्ट्रपति अलीमी बोले, डॉन ऑफ यमन अभियान में अब पीछे नहीं हटेंगे

यमन: यमन के राष्ट्रपति और सर्वोच्च सेनापति रशाद अल-अलीमी ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि चल रहा ‘डॉन ऑफ यमन’ सैन्य अभियान अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहा है। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “कितनी भी कुर्बानी देनी पड़े, अब पीछे हटना नहीं है।”
यह अभियान 4 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था। इसका मकसद हूती विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों को वापस लेना, राज्य की सत्ता फैलाना और आख़िर में राजधानी साना को आज़ाद कराना है। इसमें यमनी सशस्त्र बल, कई सैन्य गठन, जनप्रतिरोध बल और दक्षिणी जायंट्स ब्रिगेड शामिल हैं।
सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन से इस अभियान को बड़ा सहयोग मिल रहा है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने गठबंधन के पूरे समर्थन की पुष्टि की है।
13 अक्टूबर तक बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास लड़ाई तेज हो गई है। दुबाब जिले और दुबाब हवाई अड्डे के पास सक्रिय झड़पों की खबर है। सरकारी बल हूती रक्षा कमजोर करने पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि समुद्री गलियारे और पहाड़ी इलाके सुरक्षित हो सकें।
राष्ट्रपति अलीमी ने सैन्य कमांडरों को सख़्त अनुशासन बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। उन्होंने मानवीय राहत को राज्य व्यवस्था बहाल करने का अहम हिस्सा बताया। इससे पहले उन्होंने हूती लड़ाकों से हथियार डालने को कहा था और जो लोग पाला बदलेंगे, उन्हें माफ़ी देने की बात कही थी।
यह टकराव ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में 2026 का ईरान युद्ध चल रहा है। कुछ रिपोर्टों में हूती गतिविधियों पर ईरान के प्रभाव की बात भी कही गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस और यूरोपीय संघ की प्रतिनिधि काया कैलास ने हाल के हूती हमलों की निंदा की है। इनमें रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला भी शामिल है। राष्ट्रपति अलीमी ने भी इस हमले की औपचारिक निंदा की है।
सरकारी बल निर्णायक नियंत्रण चाहते हैं, लेकिन अभियान के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। कमान ढांचे को एक करना और हूती बलों की मजबूत प्रतिरोध क्षमता का मुकाबला करना अभी बाकी है।