डेनमार्क का आरोप: हूती रोक रहे यमन में UN की मानवीय सहायता

Lov Singh12 October 20262 min read0 views
डेनमार्क का आरोप: हूती रोक रहे यमन में UN की मानवीय सहायता

न्यूयॉर्क: डेनमार्क ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया है कि यमन में हूती बलों की लगातार रुकावटों की वजह से UN देश के बड़े हिस्सों में उन लाखों लोगों तक ज़रूरी मानवीय सहायता नहीं पहुँचा पा रहा, जिन्हें इसकी सख़्त ज़रूरत है। 9 अक्टूबर 2026 को दिए गए इस बयान में डेनमार्क ने साफ़ कहा कि सहायता अभियानों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।

डेनमार्क के मुताबिक़ हूती पक्ष की ओर से UN, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और राजनयिक कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने की घटनाएँ हो रही हैं। डेनमार्क ने सभी हिरासत में लिए गए कर्मचारियों की बिना शर्त और तुरंत रिहाई की माँग की। उसने नागरिकों और मानवीय कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया, ताकि राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के ज़रूरतमंदों तक पहुँच सके।

यमन के हालात पहले से ही बेहद गंभीर हैं। मौजूदा अनुमान के अनुसार 2.2 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मानवीय मदद की ज़रूरत है और लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं। अगस्त से अब तक 2 लाख से ज़्यादा नागरिक अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं, और इस संकट की सबसे भारी मार बच्चों पर पड़ रही है, जो कुपोषण का सबसे ज़्यादा शिकार हो रहे हैं।

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पैसों की तंगी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2026 की मानवीय राहत योजना को अब तक ज़रूरी वित्तीय संसाधनों का केवल 20 प्रतिशत ही मिल पाया है, यानी ज़्यादातर ज़रूरतें अधूरी पड़ी हैं।

सऊदी अरब तक पहुँचा तनाव

हालात तब और बिगड़े जब 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला हुआ। इस घटना में 12 लोगों की मौत हुई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। UN के यमन मामलों के विशेष दूत हांस ग्रुंडबर्ग ने इसे टकराव का गंभीर विस्तार बताया।

इसके बाद 11 अक्टूबर को यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने ताइज़ में आने वाले स्वास्थ्य और मानवीय संकट की चेतावनी दी। सरकार का कहना है कि वहाँ ज़रूरी आपूर्ति पर लगातार हूती नाकेबंदी जारी है। UN अधिकारियों के अनुसार इस साल की गर्मियों में चार साल का युद्धविराम खत्म होने के बाद यमन फिर से पूरी तरह युद्ध की स्थिति में लौट आया है।

12 अक्टूबर को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने खमीस मुशैत की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच रास्ते में ही रोक दिया। यमन सरकार ने सुरक्षा परिषद से तुरंत और निर्णायक कद

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