ढाका के मीरपुर में मजदूरों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज, वेतन के लिए चौथे दिन भी प्रदर्शन

ढाका के मीरपुर में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर गारमेंट वर्कर्स और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

Gautam Sahu3 November 20262 min read0 viewsWorld
ढाका के मीरपुर में मजदूरों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज, वेतन के लिए चौथे दिन भी प्रदर्शन

ढाका (बांग्लादेश): राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में मंगलवार को गारमेंट वर्कर्स और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

मंगलवार सुबह मीरपुर के कई गारमेंट कारखानों में आंशिक रूप से काम शुरू हो गया था और मजदूर वापस अपने काम पर लौटने लगे थे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद तनाव फिर बढ़ गया जब मजदूर कारखानों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस इलाके में गश्त कर रही है।

मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में अब कोई गारमेंट वर्कर मौजूद नहीं है। उन्होंने भीड़ में शामिल लोगों को उपद्रवी बताया और कहा कि वे अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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यह पूरा विवाद न्यूनतम मासिक वेतन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुरू हुआ है। वर्तमान में न्यूनतम वेतन 12,500 बी डी टी है, जबकि मजदूर इसे बढ़ाकर 30,000 बी डी टी करने की मांग कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि पूर्व अवामी लीग सरकार से जुड़े उद्योगपतियों और फैक्ट्री मालिकों ने गारमेंट सेक्टर में इस अशांति को भड़काया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ पूर्व सांसद और मंत्री इस अस्थिरता के पीछे हैं।

गृह मंत्री ने बताया कि हटाए गए शासन का समर्थन करने वाले समूह राजमार्गों की नाकाबंदी, आगजनी और हिंसा के जरिए मजदूरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग श्रम संगठनों की आड़ में इन गतिविधियों में शामिल हैं। सरकार ने हिंसक घटनाओं के वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे सबूत जुटाए हैं और कुछ लोगों को सजा दिलाई गई है।

सलाहुद्दीन अहमद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फैक्ट्री मालिकों ने जानबूझकर अपने संस्थान बंद कर दिए ताकि स्थिति और खराब हो। BGMEA और BKMEA के नेताओं ने सरकार को उन कारखानों की सूची देने पर सहमति जताई है जिन्हें गलत इरादे से बंद किया गया है।

वेतन की मांग पर बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने रविवार को एक न्यूनतम वेतन बोर्ड का गठन किया है। संशोधित वेतन संरचना चर्चा के माध्यम से तय की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि मौजूदा तीन साल की वेतन समीक्षा अवधि दिसंबर में समाप्त हो रही है।

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