ढाका में खसरा का कहर, बच्चों की मौत का आंकड़ा एक हजार के करीब पहुंचा, अस्पताल हुए ओवरलोड

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में खसरा यानी मिसल्स की बीमारी ने भयंकर रूप ले लिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ गया है। अस्पतालों में हर दिन 1,000 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ रहे हैं, जिससे चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय और महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवा के आंकड़ों के अनुसार, इस खतरनाक महामारी की शुरुआत मार्च 2026 के बीच में हुई थी, जिसके बाद से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
महामारी के आंकड़े और जान गंवाने वाले बच्चे
इस घातक बीमारी की चपेट में आकर अब तक कम से कम 986 बच्चों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद 5 सितंबर 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 991 तक पहुंच गया, क्योंकि पिछले 24 घंटों के दौरान चार और बच्चों की मौत दर्ज की गई। मार्च महीने में जब इस प्रकोप की शुरुआत हुई थी, तब से लेकर अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1,80,000 से ज्यादा संदिग्ध और पक्के मामलों की पहचान की है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विशेष सहायक एस एम जियाउद्दीन हैदर ने इस हालात को बेहद भयानक बताया और कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों को समय पर टीके की खुराक नहीं मिल पाई थी।
टीकाकरण अभियान में आई रुकावटें
बच्चों को समय पर टीका न मिलने की मुख्य वजह साल 2024 और 2025 के दौरान टीकाकरण अभियानों में आई रुकावटें थीं। उस समय राजनीतिक उथल-पुथल और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की हड़तालों के कारण स्वास्थ्य कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए थे, जिसका खामियाजा अब मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। ढाका का प्रसिद्ध शिशु अस्पताल इस समय मरीजों की भारी भीड़ को संभालने में पूरी तरह संघर्ष कर रहा है। अस्पताल आने वाले ज्यादातर बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं और वे पहले से ही कुपोषण का शिकार हैं, जिससे उनके शरीर की संक्रमण से लड़ने की ताकत बहुत कम हो चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की मदद से टीकाकरण शुरू
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद से एक बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और गावी, द वैक्सीन एलायंस मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान अभियान खासतौर पर छह महीने से पांच साल तक की उम्र के उन बच्चों को निशाना बना रहा है जो इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। हालांकि सरकार और वैश्विक संस्थाएं इस बीमारी को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं, लेकिन इसके बावजूद हर दिन नए मामलों के सामने आने का सिलसिला लगातार जारी है।