ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर हंगामा, छात्रों ने फाड़ा और लगाया गुलाम आज़म का पोस्टर.

Nura Basta16 September 20264 min read30 viewsWorld
ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर हंगामा, छात्रों ने फाड़ा और लगाया गुलाम आज़म का पोस्टर.

ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन यानी DUCSU के नए म्यूज़ियम में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस कदम का कई छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध किया है और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन्ना की एक तस्वीर और अखबार की क्लिपिंग को फाड़कर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने उस खाली जगह पर गुलाम आज़म की साल 1981 की पिटाई की तस्वीर लगा दी, जिससे यूनिवर्सिटी परिसर में तनाव का माहौल बन गया है।

म्यूज़ियम में क्यों लगाई गई थीं तस्वीरें

DUCSU ने रविवार को अपने रिनोवेशन के बाद इस म्यूज़ियम को दोबारा खोला था, जिसमें जिन्ना से जुड़ी तीन नई सामग्रियां शामिल की गईं। इनमें 21 मार्च 1948 को ढाका के रेसकोर्स मैदान में दिए गए जिन्ना के भाषण की तस्वीर, साल 1940 के लाहौर अधिवेशन की तस्वीर और साल 1970 के चुनाव से जुड़ी डॉन अखबार की क्लिपिंग शामिल थी। 1948 के उस भाषण में जिन्ना ने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राजभाषा बनाने की घोषणा की थी, जिसके विरोध में इतिहास में बड़ा आंदोलन हुआ था।

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छात्रों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन

सोमवार को ढाका यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के छात्र मोहम्मद अबू तैयब, जिन्हें हबिलडर भी कहा जाता है, म्यूज़ियम पहुंचे और उन्होंने जिन्ना की तस्वीर को फ्रेम से निकालकर नष्ट कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या DUCSU के घोषणापत्र में जिन्ना को नायक के रूप में दिखाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही उन्होंने भाषा आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम के गौरवशाली इतिहास का हवाला दिया।

इसके तुरंत बाद बांग्लादेश छात्र फेडरेशन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के कार्यकर्ताओं ने उस जगह पर जमात-ए-इस्लामी के पूर्व अमीर गुलाम आज़म की 1981 में बैतुल मुकर्रम के बाहर पिटाई की तस्वीर लगा दी। फेडरेशन के आयोजन सचिव अर्को बरुआ ने कहा कि DUCSU किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और इतिहास को कभी भी एकतरफा तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जिस तरह DUCSU की लिबरेशन वॉर एंड डेमोक्रेटिक मूवमेंट अफेयर्स की सचिव फातिमा तस्नीम ज़ुमा ने अपनी इच्छा से जिन्ना की तस्वीर लगाई, उसी तरह उन्होंने भी अपनी बात रखने के लिए गुलाम आज़म की तस्वीर लगाई है।

जिम्मेदार अधिकारियों और संगठनों का पक्ष

विवाद बढ़ने पर DUCSU की सचिव फातिमा तस्नीम ज़ुमा ने सफाई देते हुए कहा कि जिन्ना की तस्वीरें उन्हें कोई सम्मान देने के लिए नहीं लगाई गई थीं। उनके मुताबिक, ये तस्वीरें साल 1905 से 1971 तक के ढाका यूनिवर्सिटी के इतिहास को समझाने के उद्देश्य से जानकारीपूर्ण कैप्शन के साथ प्रदर्शित की गई थीं। वहीं DUCSU के महासचिव एसएम फरहाद ने भी इसी तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि जिन्ना के 1948 के भाषण को शामिल करने का मकसद उनके बांग्लादेश विरोधी रुख को दिखाना था, न कि उनका महिमामंडन करना। उनका मानना था कि इतिहास के किसी भी हिस्से को छिपाने से उसे सही ढंग से समझने में मदद नहीं मिलती है।

दूसरी तरफ, बांग्लादेश जातीयतावादी छात्र दल यानी JCD ने भी इस बात का कड़ा विरोध किया। संगठन का आरोप है कि इस तरह का प्रदर्शन भाषा आंदोलन और मुक्ति संग्राम के इतिहास के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने तुरंत तस्वीर हटाने और DUCSU को किसी भी विशेष राजनीतिक विचारधारा के प्रचार का मंच नहीं बनाने की मांग की। इसके अलावा बांग्लादेश छात्र संघ के एक गुट ने भी आपत्ति जताते हुए बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर को दोबारा प्रमुखता से प्रदर्शित करने की मांग की है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की चेतावनी

इस पूरे हंगामे के बीच ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन का कहना है कि DUCSU की हाल की कई गतिविधियां यूनिवर्सिटी के नियमों और प्रशासनिक ढांचे के बिल्कुल खिलाफ हैं। प्रशासन के मुताबिक, बिना यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट या कुलपति की मंजूरी के 'निर्भीक जुलाई' स्मारक स्थापित करना, म्यूज़ियम में जिन्ना और पूर्व छात्र नेता अब्दुल मलिक की तस्वीरें लगाना तथा शिक्षकों के मूल्यांकन के लिए एक अलग वेबसाइट शुरू करना नियमों का उल्लंघन है।

यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि DUCSU छात्रों का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि निकाय जरूर है, लेकिन उसे संस्था के मौजूदा कानूनों, नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। प्रशासन ने किसी भी तरह का समानांतर प्रशासनिक ढांचा बनाने के प्रयास का कड़ा विरोध करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। कुलपति डॉ. एबीएम ओबैदुल इस्लाम ने भी स्पष्ट किया कि DUCSU ने यूनिवर्सिटी के स्थापित नियमों के खिलाफ जाकर काम किया है। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में गहमागहमी बनी हुई है और विभिन्न छात्र संगठनों तथा शिक्षकों द्वारा बैठकों का दौर जारी है।

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