डिजी यात्रा का इंटरनेशनल ट्रायल शुरू: 7 हवाई अड्डों पर बिना संपर्क बायोमेट्रिक एंट्री
इंडिगो और एयर इंडिया ने 7 भारतीय हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा ट्रायल शुरू किया है। जानें कैसे काम करेगा यह बायोमेट्रिक सिस्टम।

नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा के एकीकरण का आधिकारिक तौर पर ट्रायल शुरू कर दिया है। 1 नवंबर 2026 से शुरू हुआ यह परीक्षण दिसंबर 2026 तक चलेगा, जिसका मकसद टर्मिनल एंट्री, सिक्योरिटी होल्ड एरिया और बोर्डिंग गेट्स पर यात्रियों को बिना संपर्क वाला बायोमेट्रिक अनुभव देना है।
इस पायलट प्रोग्राम में भारत के सात प्रमुख हवाई अड्डों को शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर के एयरपोर्ट शामिल हैं। फिलहाल यह सेवा इंडिगो और एयर इंडिया की चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर उपलब्ध कराई गई है।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को डिजी यात्रा मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपनी अंतरराष्ट्रीय डिजिटल पहचान बनानी होगी। रजिस्ट्रेशन के दौरान यूजर्स को अपने पासपोर्ट के मशीन रीडेबल ज़ोन (MRZ) को स्कैन करना होगा और ई-पासपोर्ट चिप को पढ़ने के लिए NFC तकनीक का उपयोग करना होगा। इसके बाद बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।
यह सेवा केवल उन भारतीय नागरिकों के लिए सीमित है जिनके पास वैध ई-पासपोर्ट है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह डिजिटल सुविधा मौजूदा प्रक्रियाओं की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनके पूरक के रूप में काम करेगी। यात्रियों को अपना फिजिकल पासपोर्ट साथ रखना होगा और एयरलाइन के दस्तावेज़ चेक और इमिग्रेशन की सभी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
यह ट्रायल केवल निर्धारित सात भारतीय हवाई अड्डों पर आगमन या प्रस्थान प्रक्रियाओं तक सीमित है। इसमें यूएई या अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थानों के हवाई अड्डों पर कोई प्रोसेसिंग क्षमता शामिल नहीं है। सरकार दो महीने के इस ट्रायल से मिलने वाले फीडबैक का उपयोग 2027 में इसे बड़े स्तर पर लागू करने की रणनीति बनाने के लिए करेगी।