डिजिटल कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का बड़ा विस्तार, आठ नए देश बने सदस्य, करीब 98.0 करोड़ लोगों तक पहुंची पहुंच.

डिजिटल कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी DCO काउंसिल ने आधिकारिक तौर पर 28 अगस्त 2026 को आठ नए पूर्ण सदस्य देशों और एक सहयोगी सदस्य को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। इस बड़े फैसले से संगठन का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ज्यादा बढ़ गया है और अब दुनिया भर के कई और देश डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करेंगे। इस विस्तार के बाद संगठन की कुल सदस्य संख्या 16 से बढ़कर 24 देश हो जाएगी, जिससे लगभग 98 करोड़ यानी 980 million लोगों की आबादी इस डिजिटल नेटवर्क से जुड़ जाएगी।
कौन-कौन से नए देश हुए शामिल
संगठन में जिन आठ नए देशों को पूर्ण सदस्यता दी गई है, उनमें रिपब्लिक ऑफ अल्बानिया, रिपब्लिक ऑफ अजरबैजान, रिपब्लिक ऑफ कजाकिस्तान, रिपब्लिक ऑफ केन्या, लेबनान गणराज्य, स्टेट ऑफ फिलिस्तीन, सीरियन अरब रिपब्लिक और रिपब्लिक ऑफ जाम्बिया शामिल हैं। इसके अलावा रिपब्लिक ऑफ ताजिकिस्तान को एसोसिएट मेंबर यानी सहयोगी सदस्य के रूप में मंजूरी मिली है। इन सभी देशों की घरेलू कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने और आधिकारिक दस्तावेज जमा होने के बाद सदस्यता पूरी तरह से लागू हो जाएगी। खास बात यह है कि इस बार सेंट्रल एशिया, काकेशस और वेस्टर्न बाल्कन के देशों को पहली बार इस संगठन में शामिल किया गया है।
सेक्रेटरी-जनरल ने क्या कहा
DCO की सेक्रेटरी-जनरल Deemah AlYahya ने बताया कि यह विस्तार साल 2020 में बनाए गए संगठन के मूल मॉडल की सफलता को साबित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए सदस्य देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, डेटा गवर्नेंस और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड जैसे ग्लोबल डिजिटल इकोनॉमी के नियमों को तय करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। सभी नए देश डिजिटल संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निभाते हुए वैश्विक स्तर पर नीतियां बनाने में मदद करेंगे।
ताजिकिस्तान की भूमिका और मौजूदा एजेंडा
एसोसिएट मेंबर के रूप में शामिल हुआ ताजिकिस्तान देश अपने नेशनल डेवलपमेंट स्ट्रेटजी 2030 के तहत डिजिटल इनोवेशन, स्किल्स और इन्क्लूजन से जुड़ी पहलों पर काम करेगा। फिलहाल DCO अपने चार साल के एजेंडा 2025-2028 पर तेजी से काम कर रहा है। इस एजेंडा के तहत डिजिटल पॉलिसी को बढ़ावा देना, पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमों को तय करना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने जैसे अहम काम किए जा रहे हैं ताकि आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा डिजिटल सुविधाएं मिल सकें।