यमन के शरणार्थियों के लिए जिबूती ने मांगी मदद, लाल सागर में लगातार बढ़ रही है लोगों की संख्या.

जिबूती की सरकार ने दुनिया भर के देशों से मदद की गुहार लगाई है क्योंकि उनके देश में यमन से आने वाले शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिबूती की सोशल अफेयर्स एंड सॉलिडैरिटी मिनिस्टर ओउलोउफा इस्माइल अब्दो ने बताया कि जो लोग अपनी जान बचाकर युद्ध प्रभावित क्षेत्र से भाग रहे हैं, उनमें छोटे बच्चे, बीमार लोग और विकलांग शामिल हैं जिनकी स्थिति बहुत खराब है। लाल सागर पार करके आने वाले लोगों की संख्या में भारी उछाल आया है जिसके कारण स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों पर बहुत बड़ा बोझ पड़ गया है। इस पूरी स्थिति के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप ReliefWeb की रिपोर्ट देख सकते हैं।
शरणार्थियों की बढ़ती संख्या से बढ़ी चिंता
आंकड़ों के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में ही 3,000 से ज्यादा लोग पहुंचे थे और अकेले ओबोक इलाके में 16 सितंबर 2026 तक 2,776 नए शरणार्थी रजिस्टर किए गए थे। इनमें से लगभग आधे यानी 2,800 से ज्यादा नए लोगों में छोटे बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यानी UNHCR और जिबूती के इंटीरियर मिनिस्टर उमर अब्दी सईद का कहना है कि आने वाले हफ्तों में यह संख्या बढ़कर 10,000 तक पहुंच सकती है। खासकर अक्टूबर के बाद समुद्र का मौसम साफ होने पर लोगों का आना और ज्यादा तेज हो सकता है।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की तैयारी
इस भारी भीड़ को संभालने के लिए जिबूती के प्रधानमंत्री अब्दौलकादेर कामिल मोहम्मद ने 21 सितंबर 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत कार्यों को तेज करने पर चर्चा हुई जिसमें मरकाजी रिसेप्शन सेंटर का दायरा बढ़ाना भी शामिल है। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद जिबूती की अपनी क्षमता बहुत सीमित है। UNHCR के पास स्थानीय स्तर पर फंड की भारी कमी चल रही है और एजेंसी को जिबूती के कार्यों के लिए केवल 15 प्रतिशत फंड ही मिला है। जरूरी सेवाएं देने के लिए उन्हें अभी 1.35 मिलियन डॉलर यानी एक करोड़ पैंतीस लाख डॉलर की अतिरिक्त मदद की जरूरत है।
यमन का संकट और राहत कार्य
यमन में चल रहे गृहयुद्ध के कारण देश के अंदर ही 1,30,000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और लगभग 22 मिलियन यानी दो करोड़ बीस लाख लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए UNFPA जैसी एजेंसियां मरकाजी कैंप में महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी चीजें और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही हैं। वहां तैनात मेडिकल स्टाफ ने कैंप में कई बच्चों के जन्म की पुष्टि भी की है। UNHCR ने इस पूरे क्षेत्र के लिए लेवल 1 का इमरजेंसी घोषित किया है लेकिन जिबूती सरकार का साफ कहना है कि शरणार्थियों की सेहत और सुरक्षा बचाने के लिए बाहरी देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद बेहद जरूरी है।