यमन संकट से जिबूती में शरणार्थियों की भारी भीड़, अंतरराष्ट्रीय मदद की लगाई गुहार.

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष और हिंसा के कारण पड़ोसी देश Djibouti पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जिबूती के विदेश मंत्री Abdoulkader Houssein Omar ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए साफ कह दिया है कि उनका देश अब इस भारी संख्या में आ रहे शरणार्थियों के बोझ को संभालने में असमर्थ है। लाल सागर को पार करके हजारों लोग यमन के तटीय इलाकों में हूती मिलिशिया के हमलों से बचकर जिबूती पहुंच रहे हैं, जिससे वहां की स्थानीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
शरणार्थियों की संख्या और बुनियादी ढांचे पर दबाव
आंकड़ों के अनुसार, हाल ही के हफ्तों में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण Bab Al-Mandab Strait के रास्ते करीब 30 किलोमीटर लंबी नाव यात्रा तय करके 3,000 से ज्यादा लोग जिबूती पहुंचे हैं। इन लगातार हो रही शरणार्थियों की एंट्री से ओबोक क्षेत्र के स्थानीय बुनियादी ढांचे पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ गया है। हालात यह हो गए हैं कि वहां का मार्काजी शरणार्थी शिविर अपनी क्षमता के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में जिबूती आने वाले शरणार्थियों की संख्या 10,000 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, यमन के अंदर भी हालात बहुत खराब हैं जहां 230,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हैं और 100,000 से अधिक लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चेतावनी
इससे पहले September 16, 2026 को जिबूती के आंतरिक मंत्री Omar Abdi Said ने भी चेतावनी दी थी कि यह मानवीय संकट सरकार के संसाधनों और क्षमता से बाहर हो चुका है। उससे पहले September 15, 2026 को जिबूती में UNHCR की प्रतिनिधि Sandrine Desamours ने भी इस बात पर जोर दिया था कि मानवीय सहायता के प्रयास पहले से ही भारी दबाव में हैं। उन्होंने अपील की थी कि स्थिति पूरी तरह बेकाबू होने से पहले राहत कार्यों के लिए और अधिक मदद पहुंचाई जाए। इन गंभीर हालातों को देखते हुए UNHCR ने यमन, जिबूती और सोमालिया के लिए तीन महीने की अवधि वाला लेवल 1 इमरजेंसी का ऐलान किया है।
फंड की कमी और वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा
इस संकट से निपटने में सबसे बड़ी बाधा पैसों की कमी बनी हुई है। सितंबर 2026 तक मिले आंकड़ों के मुताबिक, UNHCR का यमन ऑपरेशन सिर्फ 18% फंडेड है और उसे $25 million की जरूरत है। वहीं जिबूती में चल रहे राहत कार्य सिर्फ 15% फंडेड हैं और वहां तुरंत $13.5 million की सख्त जरूरत है। इस मुश्किल समय में WFP, UNICEF, UNFPA और IOM जैसी कई बड़ी एजेंसियां शरणार्थियों और आपदा से पीड़ित लोगों की मदद के लिए नेशनल ऑफिस ONARS के साथ मिलकर लगातार काम कर रही हैं।
मानवीय संकट के अलावा जिबूती के विदेश मंत्री ने बाब अल-मदब जलडमरूमध्य से होने वाले जहाजों के आवागमन में रुकावट की संभावना पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अस्थिरता आने से वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता का माहौल बनता जा रहा है।