क्या आज की खबरें सच दिखा रही हैं? दोहा डिबेट्स में छिड़ी बड़ी बहस

आज के दौर में जब हम अपने फोन पर खबरें देखते हैं, तो क्या हम वाकई सच जान रहे होते हैं या सिर्फ वही देख रहे होते हैं जो हमें दिखाया जाना चाहता है? इसी गंभीर सवाल को लेकर 'दोहा डिबेट्स' ने एक वैश्विक चर्चा शुरू की है। अल जजीरा इंग्लिश के माध्यम से प्रसारित इस कार्यक्रम में यह मुद्दा उठाया गया कि क्या आज की पत्रकारिता वास्तव में सच की सेवा करने के लिए बनी है या इसके पीछे कुछ और मकसद हैं।
6 अक्टूबर, 2026 को यूट्यूब पर जारी इस चर्चा में दुनिया भर के दिग्गजों ने हिस्सा लिया। पैनल में Middle East Eye के एसोसिएट एडिटर पीटर ओबोर्न, अल जजीरा मीडिया नेटवर्क की डिजिटल प्रोजेक्ट्स मैनेजिंग डायरेक्टर दीमा खतीब, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (कतर) के मीडिया एनालिटिक्स प्रोफेसर मार्क ओवेन जोन्स और कार्डिफ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता के प्रोफेसर रिचर्ड सैम्ब्रुक शामिल थे। मोहम्मद हसन द्वारा होस्ट की गई इस बहस में इस बात पर गहराई से विचार किया गया कि क्या आधुनिक मीडिया के दौर में 'साझा सच' की अवधारणा खत्म हो गई है।
सोशल मीडिया और एल्गोरिदम का खेल
बहस के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कभी भी निष्पक्ष नहीं होते। पैनल ने तर्क दिया कि इन प्लेटफॉर्म्स के पीछे काम करने वाले एल्गोरिदम इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे केवल खास तरह की सामग्री को ही बढ़ावा देते हैं, जिससे आम जनता की सोच और धारणा को प्रभावित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना था कि मीडिया के जरिए नियंत्रण करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब यह तकनीक और एल्गोरिदम के जरिए सत्ता चलाने का एक शक्तिशाली हथियार बन गया है। इस पूरी चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह खोजना था कि एक ऐसी सूचना संस्कृति का निर्माण कैसे किया जाए, जिसमें सच को सबसे ऊपर रखा जाए। हालांकि, अल जजीरा ने यह स्पष्ट किया कि चर्चा में मेहमानों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उनके अपने हैं और जरूरी नहीं कि वे नेटवर्क के संपादकीय रुख को दर्शाते हों।