जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का हमला, डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी कहा मिलेगा जोरदार जवाब

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान की तरफ से किए गए मिसाइल हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इस खतरनाक हमले के बाद अमेरिका और ईरान के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिक गई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पूरे मामले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यह साफ कर दिया है कि वाशिंगटन इस हमले को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक, ईरान को चुकानी होगी बड़ी कीमत
Fox News को दिए गए एक इंटरव्यू में बातचीत करते हुए Donald Trump ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बहुत ही जोरदार हमला करेगा। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे ईरान को करारा जवाब देंगे और इस आक्रामकता के लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अमेरिकी प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और अधिक गहरा सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिल सकता है।
अपनी बातचीत में Donald Trump ने यह भी दावा किया कि ईरान की तरफ से दागी गई लगभग सभी मिसाइलों को अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों यानी एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया था। उनके मुताबिक, सिर्फ एक मिसाइल को जानबूझकर आगे बढ़ने दिया गया क्योंकि उसकी दिशा किसी भी महत्वपूर्ण और संवेदनशील लक्ष्य की तरफ नहीं थी, जिससे किसी बड़े नुकसान का खतरा नहीं था।
जॉर्डन सेना और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा
जॉर्डन की सेना की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ईरान की सीमा से दागी गई कुल 8 मिसाइलों को देश के हवाई क्षेत्र में ही सफलता पूर्वक रोक लिया गया। दूसरी तरफ, ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने यह दावा किया कि उन्होंने जॉर्डन में स्थित King Hussein Airbase और Al-Azraq Airbase को खासतौर पर निशाना बनाया था।
ईरानी पक्ष का यह कहना था कि इन हमलों के जरिए सैन्य ठिकानों पर मौजूद तकनीकी ढांचे, जरूरी रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि, जमीनी स्तर पर हुए नुकसान और सुरक्षा उपायों को लेकर लगातार आधिकारिक बयानों की समीक्षा की जा रही है, ताकि इस पूरे मिसाइल हमले के वास्तविक असर का आकलन किया जा सके।