डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण कोरिया को चेतावनी, अलास्का एलएनजी निवेश पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान अक्सर बड़ी हलचल पैदा कर देते हैं। इस बार उनका निशाना दक्षिण कोरिया बना है। ट्रंप ने सियोल को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि यदि उसने अलास्का के प्रस्तावित एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई और समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिका उससे भारी आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है या रकम दोगुनी तक वसूल सकता है।
व्हाइट हाउस में दी गई चेतावनी
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। दक्षिण कोरियाई समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, ट्रंप ने यह तल्ख टिप्पणी करते हुए निवेश समझौते को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि दक्षिण कोरिया इस पर अमल नहीं करता है, तो अतिरिक्त राशि किस रूप में और कैसे वसूल की जाएगी।
इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के अमेरिकी निवेश पैकेज के तहत अलास्का एलएनजी परियोजना के अलावा टेक्सास में गैस आधारित बिजली संयंत्र और आठ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया था। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक का यह भी दावा था कि दक्षिण कोरिया इस विशाल अलास्का एलएनजी परियोजना में 50 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने जा रहा है।
सियोल का सतर्क रुख
एक तरफ जहां अमेरिकी प्रशासन इस निवेश को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं दक्षिण कोरियाई सरकार ने बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है। सियोल का कहना है कि अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट में निवेश को लेकर अभी तक कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी बड़े आर्थिक समझौते से पहले परियोजना की व्यावसायिक व्यवहार्यता, यानी उसकी लाभप्रदता और अन्य जरूरी कानूनी शर्तों की गहन समीक्षा की जानी बेहद जरूरी है।
दोनों देशों के बीच हुए दस्तावेजों में भी इस बात के संकेत मिलते हैं कि यह परियोजना पूरी तरह से वाणिज्यिक शर्तों और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने पर निर्भर करती है। यही वजह है कि अमेरिकी बयानों और दक्षिण कोरियाई प्रतिक्रिया के बीच एक स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है, जहां अमेरिका इसे तय मान रहा है, वहीं सियोल इसे अभी शुरुआती दौर की बातचीत ही बता रहा है।
क्या है अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट?
यह ऊर्जा क्षेत्र की एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके तहत अलास्का के नॉर्थ स्लोप क्षेत्र से लेकर दक्षिणी अलास्का तक लगभग 1,298 किलोमीटर लंबी विशाल पाइपलाइन बिछाने की योजना है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक गैस को तरलीकृत (लिक्विफाइड) करके एशियाई बाजारों तक पहुंचाना है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 44.5 अरब डॉलर से 54.5 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है।
अब देखना यह होगा कि अमेरिका के इस कड़े कूटनीतिक दबाव के बाद दक्षिण कोरियाई सरकार इस अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट पर क्या अंतिम निर्णय लेती है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों की दिशा तय कर सकता है।