डॉ. महरंग बलोच का बड़ा बयान, कहा- बलोचिस्तान में न्यायपालिका ने खो दिया जनता का भरोसा.

बलोच यूनिटी कमेटी की प्रमुख और जेल में बंद राजनीतिक नेता डॉ. महरंग बलोच ने पाकिस्तान के बलोचिस्तान से एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान जारी किया है। उनके इस बयान को हाल ही में 12 सितंबर को द बलूचिस्तान पोस्ट ने प्रसारित किया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अब वहां की अदालतें और न्यायपालिका पूरी तरह से जनता का विश्वास खो चुकी हैं और लोग न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं।
जजों पर दबाव का बड़ा आरोप
डॉ. महरंग बलोच ने जेल के अंदर से जारी अपने संदेश में दावा किया है कि बलोचिस्तान के चीफ जस्टिस कामरान मलाखिल खुद बलोच यूनिटी कमेटी के सभी मामलों और मुकदमों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मामलों की सुनवाई कर रहे जस्टिस मोहम्मद अली मुबीन और जस्टिस कादिर शाह बुखारी जैसे कई न्यायाधीशों ने खुद कई मौकों पर यह स्वीकार किया है कि उन पर ऊपर से भारी दबाव बनाया जा रहा है। संबंधित जजों ने कथित तौर पर यह भी कहा है कि उन्हें इन मामलों में सजा सुनाने के लिए सख्त निर्देश मिले हैं। नेता का मानना है कि यह स्थिति किसी भी देश में न्यायिक आजादी और उसकी निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा और काला धब्बा है।
बचाव के बुनियादी अधिकारों से वंचित करने का दावा
आगे अपनी बात रखते हुए डॉ. महरंग ने बताया कि बीते 7 सितंबर को अदालत में वकीलों की हड़ताल थी और बचाव पक्ष का कोई भी वकील वहां मौजूद नहीं था। इसके बावजूद गुलजादी बलूच के केस में गवाह से पूछताछ की गई और सुनवाई आगे बढ़ाई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके अपने मामलों में अदालत द्वारा बिना उनकी अनुमति के सरकारी वकीलों की नियुक्ति की गई। इन सरकारी वकीलों को कई तरह के विशेष अधिकार देकर इस्लामाबाद से लाया गया, जबकि खुद उन्हें और उनके साथियों को अपने बचाव करने के बेहद बुनियादी कानूनी अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखा गया।
न्यायपालिका को बंधक बनाने का गंभीर मामला
महरंग बलोच ने कड़े शब्दों में कहा कि मौजूदा समय में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान में न्यायपालिका को पूरी तरह से बंधक बना लिया गया है। उनके पास अपनी उम्रकैद की सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का पूरा संवैधानिक और कानूनी अधिकार मौजूद है और इस मामले में उनकी अपील की सुनवाई के लिए अक्टूबर महीने की तारीख तय की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बलोच यूनिटी कमेटी ने बीते 13 जून से फेसलेस ट्रायल के खिलाफ कुल 20 केस का पूरी तरह से बॉयकॉट किया है। इस संबंध में उनकी एक महत्वपूर्ण याचिका बलोचिस्तान उच्च न्यायालय में पहले ही जमा कराई जा चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मदद की गुहार
डॉ. महरंग ने आरोप लगाया कि चीफ जस्टिस पिछले छह महीनों से उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से लगातार बच रहे हैं और जानबूझकर उसे बार-बार गैर सूचीबद्ध कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुख्य न्यायाधीश को किसी एक राजनीतिक पार्टी या पक्ष की तरह काम करने के बजाय बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह से निष्पक्ष फैसले लेने चाहिए। इस पूरी स्थिति से दुखी होकर डॉ. महरंग बलोच ने पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट और तमाम इंटरनेशनल ह्यूमन Rights संगठनों से तुरंत इस मामले में दखल देने की बड़ी मांग की है ताकि वहां के लोगों को सही न्याय मिल सके।