सनाआ के आसमान में ड्रोन की भारी हलचल, सऊदी गठबंधन ने हूती ठिकानों को किया निशाना

यमन की राजधानी सनाआ में तनाव चरम पर पहुंच गया है। 8 अक्टूबर 2026 को सनाआ के आसमान में भारी ड्रोन एक्टिविटी दर्ज की गई, जो सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती जंग का संकेत है। सऊदी गठबंधन ने पुष्टि की है कि उन्होंने सनाआ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थित एक ड्रोन हैंगर और अल-दैलमी एयर बेस पर सटीक हवाई हमले किए हैं।
यह पूरी कार्रवाई 'फज्र यमन' ऑपरेशन के तहत की जा रही है। इसी अभियान के हिस्से के रूप में, सनाआ के उत्तर में स्थित जादर इलाके में एक ड्रोन हमला किया गया, जिसका मकसद हूती नेतृत्व और उनकी सैन्य गतिविधियों को ध्वस्त करना था। सऊदी गठबंधन का दावा है कि उन्होंने अब तक 82 सैन्य ठिकानों, जिनमें मिसाइल फैसिलिटी और हूतियों के जमावड़े वाले स्थल शामिल हैं, को तबाह कर दिया है। साथ ही, रियाद के उत्तर में हूतियों द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक नाकाम भी किया गया।
हूतियों की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सारी ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबहा एयरपोर्ट पर नए ड्रोन और मिसाइल हमलों की जिम्मेदारी ली है। यह तनाव 6 और 7 अक्टूबर को हुए हमलों के बाद और बढ़ गया है, जिसमें अबहा और किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन विदेशी नागरिकों (मिस्र, अल्जीरिया और सूडान के निवासी) की जान चली गई और 36 लोग घायल हुए।
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने स्पष्ट किया है कि 'फज्र यमन' ऑपरेशन का लक्ष्य पूरे देश और विशेष रूप से सनाआ पर सरकारी नियंत्रण बहाल करना है। उन्होंने उन लोगों को माफी का प्रस्ताव भी दिया है जो हूती बलों का साथ छोड़ देंगे।
इस हिंसा पर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है। भारत ने सऊदी नागरिक बुनियादी ढांचे पर हूतियों के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया है। वहीं, 5 अक्टूबर को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने इस हिंसा की निंदा के लिए एक आपातकालीन बैठक की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 9 अक्टूबर 2026 को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक करेगी, जिसमें विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग और मानवीय मामलों के सहायक महासचिव मोहम्मद यहया ब्रीफिंग देंगे।