दुबई में फर्जी डिजिटल मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर बेचने वाले क्लिनिक क्लर्क और उसके साथियों को कोर्ट ने सुनाई जेल की सजा

दुबई: दुबई की क्रिमिनल कोर्ट ने एक क्लिनिक क्लर्क और उसके कई साथियों को जेल भेज दिया है। इन लोगों ने मिलकर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को फर्जी इलेक्ट्रॉनिक सिक लीव सर्टिफिकेट (बीमारी की छुट्टी के प्रमाण पत्र) बेचने का धंधा चलाया था।
जांच में पता चला कि क्लर्क ने क्लिनिक के आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ पोर्टल का गलत इस्तेमाल किया। वह बिना किसी मरीज की जांच किए, डॉक्टरों के डिजिटल सिग्नेचर लगाकर पिछली तारीखों के मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार करता था।
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब एक प्राइवेट कंपनी ने अपने कर्मचारियों की छुट्टियों के पैटर्न पर शक किया। कंपनी ने देखा कि कई स्टाफ सदस्य बार-बार बीमारी की छुट्टी मांग रहे थे और उन सबके सर्टिफिकेट पर एक ही क्लिनिक की डिजिटल स्टैम्प लगी थी।
अदालत में चली कानूनी कार्यवाही के दौरान आरोपियों पर दस्तावेजों में जालसाजी, विश्वासघात और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी जैसे कई आरोप साबित हुए। बचाव पक्ष ने इसे प्रशासनिक गलती बताया था, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि डिजिटल सिस्टम का जानबूझकर दुरुपयोग किया गया।
यूएई के कानून के मुताबिक, सभी मेडिकल सर्टिफिकेट DHA लाइसेंस प्राप्त केंद्रों से आधिकारिक 'शेरयान' इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए जारी होने चाहिए। नियम यह है कि छुट्टी के प्रमाण पत्र के लिए उसी दिन सत्यापित परामर्श होना जरूरी है।
जेल की सजा के साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी विदेशी आरोपियों को उनकी सजा पूरी होने के बाद देश से बाहर निकाल दिया जाए। इसके अलावा, डिजिटल जालसाजी और मेडिकल रिकॉर्ड में हेराफेरी के लिए दोषियों पर भारी जुर्माना और हर्जाना भी लगाया गया है।