दुबई में दो भारतीयों ने जीता 10 लाख डॉलर, रातों-रात चमकी किस्मत

Nura Basta26 September 20263 min read52 viewsExpat Issues
दुबई में दो भारतीयों ने जीता 10 लाख डॉलर, रातों-रात चमकी किस्मत

दुबई में रहने वाले कई भारतीय प्रवासियों का एक आम सपना होता है कि उनकी किस्मत बदले और वे रातों-रात करोड़पति बन जाएं। हाल ही में यह सपना दो भारतीय प्रवासियों, भानु सोभानी और सरवनन मलैराज, के लिए हकीकत में बदल गया। दुबई ड्यूटी फ्री मिलेनियम मिलियनेयर ड्रॉ में उन दोनों ने प्रत्येक 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 3.67 मिलियन दिरहम) जीते हैं। यह खबर खाड़ी देशों में रहने वाले हजारों भारतीयों के लिए प्रेरणा और उम्मीद की एक नई कहानी लेकर आई है।

यह जीत 1999 में इस प्रमोशन के शुरू होने के बाद से 283वें और 284वें भारतीय विजेताओं के रूप में दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि दुबई ड्यूटी फ्री ड्रॉ ने कई भारतीय परिवारों की जिंदगी बदली है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।

भानु सोभानी की कहानी: निवेश की सोच रंग लाई

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भानु सोभानी, जिनकी उम्र 40 साल है, दुबई के बर दुबई इलाके में एक कपड़ा फैक्ट्री के मालिक हैं। वह पिछले 10 सालों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहे हैं। उन्होंने अपना जीतने वाला टिकट, जिसका नंबर 0489 और सीरीज 557 था, 2 सितंबर को कॉनकोर्स बी से खरीदा था। उस समय वह पोलैंड की यात्रा पर जा रहे थे। सोभानी की दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र 13 और 6 साल है, और उनके पास चार विला भी हैं। वह अपनी जीत की रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट, रियल एस्टेट में निवेश और भारत के एक मंदिर में दान करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने पहले उन्हें टिकट खरीदने से मना किया था, लेकिन भानु का मानना था कि यह एक तरह का निवेश है, जो अब सही साबित हुआ है। उनका यह विश्वास सच में रंग लाया और उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है।

सरवनन मलैराज का संघर्ष और जीत

दूसरे विजेता, सरवनन मलैराज, 36 साल के हैं और अबू धाबी में एक दुकान में काम करते हैं। वह 17 साल पहले चेन्नई से UAE आए थे। उनकी मासिक आय लगभग 8,000 दिरहम है और उनके चार साल के जुड़वां बच्चे हैं। मलैराज ने पहले अपनी बहन की शादी के लिए परिवार की जमीन बेची थी, जो उनके बलिदान और परिवार के प्रति उनके समर्पण को दिखाता है। अब वह अपनी जीत की राशि का उपयोग अपने बच्चों की शिक्षा के लिए करना चाहते हैं और तमिलनाडु में अपनी खुद की एक दुकान खोलना चाहते हैं। यह राशि उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगी और उन्हें एक बेहतर जीवन जीने का मौका देगी।

प्रवासी श्रमिकों के अधिकार और यह जीत

यह जीत ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों का मुद्दा लगातार चर्चा में है। हाल ही में, कतर में सामुदायिक समूहों ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, और ओमान में भी श्रम संबंधी मुद्दों की खबरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में, सोभानी और मलैराज की यह जीत कई प्रवासियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपने और अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य बनाने का सपना देखते हैं। दुबई ड्यूटी फ्री जैसे ड्रॉ इन प्रवासियों को एक ऐसा मौका देते हैं जो उनकी किस्मत पूरी तरह से बदल सकता है और उनके सपनों को हकीकत में बदल देता है।

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