Dubai Duty Free: दो भारतीय प्रवासियों की खुली किस्मत, रातों-रात बने 1-1 मिलियन डॉलर के मालिक.

दुबई में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध Dubai Duty Free Millennium Millionaire ड्रा में दो भारतीय प्रवासियों की किस्मत चमक गई है और दोनों ने एक-एक मिलियन डॉलर यानी करीब 3.67 मिलियन दिरहम की भारी-भरकम राशि जीत ली है। 26 सितंबर 2026 को हुई इस लकी ड्रॉ की घोषणा में जिन दो भाग्यशाली भारतीयों का नाम सामने आया, उनमें सरवनन मलैराज और भानु सोभानी शामिल हैं। इस जीत के साथ ही ये दोनों उन चुनिंदा भारतीय नागरिकों की सूची में शामिल हो गए हैं जो साल 1999 से शुरू हुए इस प्रमोशन के बाद से अब तक विजेता बन चुके हैं। सरवनन मलैराज इस ड्रॉ के 283वें और भानु सोभानी 284वें भारतीय विजेता बने हैं। खाड़ी देशों में रह रहे आम भारतीयों के लिए इस तरह के लकी ड्रॉ किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं होते हैं क्योंकि प्रवासी मजदूरों और कर्मचारियों के लिए वहां भविष्य को सुरक्षित करने के साधन सीमित होते हैं।
विजेताओं की पूरी कहानी और आगे की योजनाएं
बुर दुबई में रहने वाले 40 वर्षीय भानु सोभानी एक टेक्सटाइल फैक्ट्री के मालिक हैं और वह साल 2021 से लगातार इसके टिकट खरीद रहे थे। उन्होंने सीरीज 557 का टिकट नंबर 0489 खरीदा था जिसे उन्होंने पोलैंड की यात्रा के दौरान 2 सितंबर को Concourse B से लिया था। दो बच्चों के पिता भानु सोभानी ने अपनी इस जीत के बाद बताया कि वह इस राशि को फिक्सड डिपॉजिट में लगाएंगे, दुबई में और प्रॉपर्टी खरीदेंगे जहां उनके पास पहले से ही चार विला मौजूद हैं, और साथ ही भारत के एक मंदिर में दान भी देंगे। दूसरी ओर, आबू धाबी में साल 2009 से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में स्टोरकीपर के तौर पर काम करने वाले 36 वर्षीय सरवनन मलैराज ने सीरीज 558 का टिकट नंबर 4905 ऑनलाइन खरीदा था। सरवनन ने अपनी इस प्राइज मनी का इस्तेमाल भारत के तमिलनाडु राज्य में एक मॉल बनाने के लिए करने का फैसला किया है। खाड़ी देशों में पसीना बहाने वाले इन आम प्रवासियों के लिए यह रकम उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलने का काम करती है और उनके परिवारों के लिए एक नया सवेरा लेकर आती है।
भारतीय प्रवासियों की जिंदगी और सामने आती चुनौतियां
खाड़ी देशों में कुल मिलाकर लगभग नौ से दस मिलियन भारतीय नागरिक संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन और अन्य देशों में रहते हैं और अपनी आजीविका कमाते हैं। खाड़ी क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा समझौतों की कमी और सीमित एंड-ऑफ-सर्विस बेनिफिट्स के कारण इस तरह के लकी ड्रॉ और रैफल्स प्रवासियों के लिए वित्तीय सुरक्षा हासिल करने का एक बड़ा जरिया बन चुके हैं। हालांकि, इन कुछ चमकती हुई कहानियों के साथ-साथ खाड़ी देशों में रहने वाले कई अन्य प्रवासियों की जिंदगी में गंभीर चुनौतियां और संघर्ष भी देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के एक अपहोल्स्टर जिसे मुशीर अब्बास के रूप में पहचाना गया है, उन्हें मई 2026 में ओमान के सलालाह स्थित अल होस्न फर्नीचर फैक्ट्री द्वारा भर्ती किया गया था लेकिन बाद में उन्हें बिना वेतन के छोड़ दिया गया, वे बेघर हो गए और उनका पासपोर्ट भी ले लिया गया। इसके अलावा, उडुपी के रहने वाले और शारजाह एयरपोर्ट पर 14 साल से काम करने वाले कर्मचारी अलविन प्रकाश कुंदर का मामला भी सामने आया है, जिनकी अगस्त 2026 में उनकी गाड़ी के अंदर से लाश बरामद हुई थी और इस मामले में उनकी पत्नी और बेटा भी लापता बताए गए हैं। इस तरह की घटनाएं यह बताती हैं कि जहां कुछ लोगों की किस्मत रातों-रात बदल जाती है, वहीं कई साधारण मजदूरों और कर्मचारियों को अपनी रोजी-रोटी और सम्मान के लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।