दुबई में शेयर्ड हाउसिंग के नए नियम लागू: अब परिवारों और सिंगल लोगों के लिए अलग होंगे घर

दुबई में रहने वाले प्रवासियों और मकान मालिकों के लिए एक बड़ी खबर है। दुबई नगर पालिका ने दुबई शेयर्ड हाउसिंग नियम के तहत नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कानून संख्या 4 (2026) के तहत लागू ये नियम 26 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। नए ढांचे के तहत अब यह अनिवार्य होगा कि आवासीय इकाइयों को या तो केवल परिवारों के लिए या केवल व्यक्तियों (सिंगल्स) के लिए निर्धारित किया जाए। एक ही यूनिट में परिवारों और सिंगल लोगों को एक साथ रहने की अनुमति नहीं होगी।
इन नए मानकों के तहत रहने की जगह और सुविधाओं पर कड़ा जोर दिया गया है। अब हर निवासी के लिए बेडरूम में कम से कम पांच वर्ग मीटर जगह होनी चाहिए। बाथरूम की सुविधाओं के लिए यह तय किया गया है कि हर चार निवासियों के लिए एक पूरा बाथरूम (वॉशबेसिन, टॉयलेट और शॉवर के साथ) होना जरूरी है। वहीं, फैमिली शेयर्ड हाउसिंग के मामले में हर परिवार के लिए एक अलग बेडरूम और प्राइवेट बाथरूम होना अनिवार्य होगा।
इन इलाकों में बदलेंगे रहने के नियम और लागू होगा जुर्माना
दुबई प्रशासन ने कुछ खास इलाकों में शेयर्ड हाउसिंग पर पाबंदी लगाई है। शेख जायद रोड, बनियास रोड, जुमेराह रोड और अल वास्ल रोड जैसे व्यावसायिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों में अब केवल परिवार ही रह सकेंगे। दूसरी ओर, अल बरशा 1, अल वरका 1, अल मुरक्कात और अल रिगा सहित 44 से अधिक क्षेत्रों को शेयर्ड हाउसिंग के लिए मंजूरी दी गई है।
यह नियम अपार्टमेंट, स्टैंड-अलोन हाउस, रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और मिक्स्ड-यूज़ बिल्डिंग्स जैसी छह श्रेणियों पर लागू होंगे, हालांकि लेबर कैंप इन नियमों से बाहर रहेंगे। मकान मालिकों को किसी भी नए निर्माण या बदलाव के लिए 'बिल्ड इन दुबई' प्लेटफॉर्म के जरिए परमिट लेना होगा।
अनुपालन के लिए 8 सितंबर 2026 से एक साल की मोहलत दी गई है, जो 8 सितंबर 2027 तक चलेगी। लेकिन ध्यान रहे कि मौजूदा उल्लंघनों को तुरंत ठीक करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर 500 दिरहम से लेकर 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि एक साल के भीतर दोबारा गलती पकड़ी गई, तो यह जुर्माना दोगुना होकर 10 लाख दिरहम तक पहुंच सकता है।
दुबई नगर पालिका की बिल्डिंग रेगुलेशन एंड परमिट एजेंसी की सीईओ मरियम अल मुहैरी ने कहा कि ये नियम तकनीकी, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए लाए गए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि भारी जुर्माने के डर से लोग 2027 की समय सीमा से पहले ही इन नियमों को अपना लेंगे।