दुबई स्कूलों में बच्चों की फोटो पर सख्त रोक, आज से नए नियम हुए लागू।

Aanya13 October 20262 min read0 viewsUAE
दुबई स्कूलों में बच्चों की फोटो पर सख्त रोक, आज से नए नियम हुए लागू।

दुबई: दुबई और शारजाह के कई निजी स्कूलों ने अभिभावकों और बाहरी लोगों के लिए नए सर्कुलर जारी किए हैं। इनमें साफ कहा गया है कि स्कूल परिसर में ऐसी फोटो या वीडियो नहीं लिए जाएँगे, जिनमें दूसरे बच्चे या स्टाफ के लोग उनकी इजाज़त के बिना दिख रहे हों। यानी दुबई स्कूलों में अब फोटो खींचने से पहले सोचना ज़रूरी होगा।

यह फैसला यूएई की निजता से जुड़ी ज़रूरतों और नॉलेज एंड ह्यूमन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KHDA) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक बताया जा रहा है। पाबंदी सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। गलियारे, खेल का मैदान, असेंबली और बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने आने वाले पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट पर भी यह लागू होगी।

सबसे अहम बात यह है कि अभिभावकों को सख्ती से कहा गया है कि दूसरे बच्चों वाली तस्वीरें या वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप या सोशल मीडिया पर साझा न करें। हालांकि माता-पिता अपने बच्चे की फोटो खींच सकते हैं। स्कूल की आधिकारिक फोटोग्राफी भी पहले से तय सहमति प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

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खेल दिवस और समारोह में भी सीमा तय

कुछ स्कूल खेल दिवस या प्रस्तुति जैसे कार्यक्रमों में चुनिंदा मौके दे सकते हैं, जब अभिभावक तस्वीरें ले सकें। लेकिन स्कूल ने साफ किया है कि कार्यक्रम में मौजूद होना अपने आप यह इजाज़त नहीं देता कि आप दूसरे लोगों को कैमरे में कैद करें। यानी किसी भी कार्यक्रम में अगर दूसरे बच्चे फ्रेम में आ रहे हों, तो उनकी निजता का ध्यान रखना ही होगा।

कानूनी जानकार मानते हैं कि इस मामले में लापरवाही भारी पड़ सकती है। यूएई के साइबर क्राइम्स कानून (फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 34, 2021, अनुच्छेद 44) और निजी डेटा संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन होने पर गंभीर सज़ा हो सकती है। शिकायत के आधार पर किसी बच्चे की तस्वीर बिना इजाज़त खींचने या साझा करने को अपराध माना गया तो 1.5 लाख से 5 लाख दिरहम तक जुर्माना, या जेल की सज़ा भी हो सकती है।

KHDA के मुताबिक, कमज़ोर स्थिति में मौजूद छात्रों की तस्वीर बिना अनुमति लेना सीधे तौर पर निजता का उल्लंघन माना जाएगा। यही वजह है कि स्कूलों ने ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप के समय फिल्मांकन न करने की विस्तृत सूचनाएँ भी जारी की हैं। GEMS Winchester और International School of Choueifat जैसे स्कूलों ने भी अभिभावकों को इसी तरह की चेतावनी दी है।

भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के कई अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आज के दौर में बच्चों की डिजिटल पहचान बहुत तेज़ी से फैल सकती है, इसलिए उनकी तस्वीरों को सुरक्षित रखना ज़रूरी है। स्कूलों का मकसद भी यही है कि बच्चों का डिजिटल फुटप्रिंट उनकी मर्ज़ी और सुरक्षा के दायरे में रहे।

अगर आप दुबई या शारजाह में बच्चों को स्कूल छोड़ने या लेने जाते हैं, तो अगली बार कैमरा निकालने से पहले एक बार ज़रूर सोचें। आपका एक क्लिक किसी दूसरे बच्चे की निजता पर भारी पड़ सकता है।

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