Dubai में साझा आवास के लिए नया नियम लागू, किराएदार अब 30 दिन के नोटिस पर छोड़ सकेंगे घर

दुबई प्रशासन ने Law No. 4 of 2026 को लागू कर दिया है, जिससे साझा आवास यानी शेयर्ड हाउसिंग में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल गई है। इस नए नियम के तहत बेड स्पेस, पार्टीशंड रूम और शेयर्ड अपार्टमेंट्स में रहने वाले किराएदार अब अपने कॉन्ट्रैक्ट की समय सीमा पूरी होने से पहले ही उसे खत्म कर सकते हैं। गल्फ न्यूज और खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कानून 25 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है, जो विशेष रूप से उन प्रवासियों और भारतीय कामगारों के लिए बहुत फायदेमंद है जो कम बजट में कमरे या बेड स्पेस शेयर करके रहते हैं।
किराएदारों को मिला कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का अधिकार
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई किराएदार अपना कमरा या शेयर्ड हाउसिंग छोड़ना चाहता है, तो उसे कम से कम 30 दिन पहले लिखित रूप में नोटिस देना होगा। हालांकि, यदि पुराने या मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट में इससे लंबी अवधि का नोटिस देने की बात लिखी है, तो वही नियम लागू रहेगा। किराएदारों को यह नोटिस कानूनी रूप से मान्य तरीकों जैसे कि नोटरीकृत दस्तावेजों, ईमेल या हाथ से डिलीवरी के जरिए भेजना होगा और सुरक्षा के लिए इसका रिकॉर्ड भी अपने पास संभाल कर रखना जरूरी है।
रिफंड और वित्तीय लेन-देन के कड़े नियम
किराए के पैसों के लेन-देन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मकान मालिक कॉन्ट्रैक्ट टूटने की स्थिति में केवल एक महीने का किराया ही काट सकते हैं, और बाकी का बचा हुआ एडवांस पैसा किराएदार को वापस करना होगा। यदि मकान मालिक नोटिस मिलने के 30 दिन के भीतर रिफंड नहीं देता है, तो किराएदार दुबई रेंटल डिस्प्यूट्स सेंटर के एग्जीक्यूशन जज के पास याचिका दायर कर सकते हैं। इसके अलावा, जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई दूसरी सहमति न बने, तब तक किराया हर महीने ही चुकाया जाएगा।
किन जगहों पर लागू होगा यह कानून
यह नया कानून अपार्टमेंट, विला, टाउनहाउस, मकान और ऐसी बहुमंजिला इमारतों पर लागू होता है जहां रसोई या बाथरूम जैसी सुविधाएं साझा की जाती हैं। हालांकि, सामूहिक श्रमिक शिविर यानी कलेक्टिव लेबर कैंप्स को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी Khaleej Times और अल कब्बान लीगल की रिपोर्ट से प्राप्त हुई है, जिसे 25-26 सितंबर 2026 को साझा किया गया था। इस बदलाव से दुबई में रहने वाले लाखों प्रवासियों को बड़ी कानूनी सुरक्षा मिल गई है।