UN में एस जयशंकर ने की समुद्री सुरक्षा की बात, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता

New York में संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के दौरान विदेश मंत्री S Jaishankar ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि किस तरह से लगातार कमर्शियल जहाजों और उस पर काम करने वाले नाविकों पर हमले हो रहे हैं। ओमान की खाड़ी और लाल सागर जैसे इलाकों में जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कई भारतीय नाविकों की जान भी जा चुकी है। इस गंभीर मुद्दे पर भारत और लाइबेरिया ने मिलकर कई देशों को साथ जोड़ा है ताकि समुद्र में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके।
समुद्र में बढ़ते हमलों से सहमे नाविक और उनके परिवार
विदेश मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ये घटनाएं अब कभी-कभार होने वाली नहीं रह गईं हैं। उन्होंने हाल ही में हुए कुछ दर्दनाक हादसों का जिक्र किया। ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले जहाज MV Cape Dove पर हमला हुआ था, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। इसके ठीक 10 दिन पहले पनामा के तेल टैंकर El Gaya पर भी हमला हुआ था, जिसमें एक भारतीय क्रू मेंबर लापता हो गया था। इसके अलावा काला सागर यानी Black Sea में भी रूसी क्षेत्रीय जल में जहाज MV Omorfi पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय चीफ ऑफिसर की जान चली गई। इसके अगले ही दिन ओडेसा से निकले जहाज MV Golden Leo पर भी हमला हुआ जिसमें चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई। इन हमलों में केवल भारतीय ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के नाविक भी शिकार बने हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
एस जयशंकर ने कहा कि काला सागर से लेकर लाल सागर और खाड़ी देशों तक नागरिक जहाजों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि व्यापार को बाधित करने वाली और बेकसूर लोगों की जान लेने वाली ये हरकतें बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं। दुनिया भर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिदिन $140 billion यानी 140 अरब डॉलर से ज्यादा का होता है। इसमें महासागरों की हिस्सेदारी 80 percent से अधिक है और दुनिया भर के मर्चेंट बेड़े में करीब 2 million यानी बीस लाख नाविक अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में समुद्र में नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
नाविकों की समस्याएं और भारत की नई पहल
समुद्र में काम करने वाले लोगों को जहाजों पर लंबे समय तक बंद रहना पड़ता है, परिवार से दूरी और मानसिक तनाव जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भारत और लाइबेरिया ने मिलकर 'Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers' नाम से एक नया मंच बनाया है। भारत दुनिया को सबसे ज्यादा नाविक देने वाले देशों में शामिल है, जबकि लाइबेरिया के पास दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्री है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ हफ्ते पहले BRICS समिट के दौरान एक सीफारेस इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था, जो समुद्री अधिकारियों और दूतावासों को आपस में जोड़ेगा ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके। भारत ने इससे पहले पिछले साल नवंबर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी ग्रीस और फिलीपींस के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।