East Jerusalem: पूर्वी यरुशलम के निजी और क्रिश्चियन स्कूलों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, 15 हजार छात्र हुए प्रभावित

पूर्वी यरुशलम के कब्जे वाले इलाकों में निजी और क्रिश्चियन स्कूलों ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 से एक अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत कर दी है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही इस हड़ताल की वजह से शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह से बंद रखना पड़ा है, जिससे लगभग 15,000 छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इस बड़े विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण वेस्ट बैंक से आने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रवेश परमिट का अचानक नवीनीकरण न किया जाना और फिलिस्तीनी स्कूलों में इजरायली पाठ्यक्रम को लागू करने का लगातार प्रयास है।
प्रवेश परमिट न मिलने से स्कूलों का संचालन हुआ ठप
स्कूल प्रशासनों ने जानकारी दी कि इजरायली अधिकारियों द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के 70 से अधिक शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों के प्रवेश परमिट को रद्द कर दिया गया या उन्हें आने की अनुमति नहीं दी गई। अल-मूट्रान स्कूल के डायरेक्टर-जनरल रिचर्ड ज़ानानिरी ने बताया कि उनके संस्थान की लगभग 40 प्रतिशत फैकल्टी अभी भी बिना वैध अनुमति के काम करने को मजबूर है या आ नहीं पा रही है। उन्होंने इस कदम को राजनीतिक मंशा करार दिया, जिसका उद्देश्य वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के बीच के संबंधों को कमजोर करना और तोड़ना है। यरुशलम के क्रिश्चियन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के जनरल सचिवालय ने यह साफ कर दिया है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सभी संबंधित कर्मचारियों को नए परमिट जारी नहीं कर दिए जाते, क्योंकि मौजूदा स्थिति में नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत करना पूरी तरह असंभव हो गया है।
पाठ्यक्रम बदलने को लेकर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों में तनातनी
दूसरी तरफ, यरुशलम गवर्नरेट ने बताया कि इजरायल सरकार द्वारा 45,000 से अधिक फिलिस्तीनी छात्रों यानी पूर्वी यरुशलम की कुल छात्र आबादी के लगभग 38 प्रतिशत हिस्से पर इजरायली पाठ्यक्रम थोपा जा रहा है। इसका मुख्य निशाना नए पहली और सातवीं कक्षा के छात्र बन रहे हैं। यह कदम जनवरी 2026 में पारित और फरवरी 2026 में लागू किए गए उस कानून के बाद उठाया गया है, जिसके तहत शिक्षकों के लिए इजरायली मान्यता अनिवार्य कर दी गई है। यरुशलम गवर्नरेट के प्रवक्ता मारूफ अल-रिफाई ने इस पाठ्यक्रम नीति को फिलिस्तीनी पहचान पर एक अभूतपूर्व हमला बताया, जबकि फिलिस्तीनी शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है।
इजरायली अधिकारियों का पक्ष और सुरक्षा मंजूरी का दावा
इस पूरे मामले में इजरायली रक्षा मंत्रालय की एक शाखा COGAT (कोऑर्डिनेटर ऑफ गवर्नमेंट एक्टिविटीज इन द टेरिटरीज) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। COGAT के अधिकारियों का कहना है कि जिन शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों ने सुरक्षा मंजूरी और सभी जरूरी पात्रता नियमों को पूरा किया था, उन सभी को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही वैध परमिट जारी कर दिए गए थे। इस बीच, Ir Amim समेत कई अंतरराष्ट्रीय निगरानी समूह पूर्वी यरुशलम की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते तनाव और इन स्कूलों के बंद होने से छात्रों पर पड़ने वाले असर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।