सऊदी अरब की रक्षा के लिए राष्ट्रपति अल-सिसी ने मिस्र की संसद का आपातकालीन सत्र बुलाया ताकि सैन्य मदद मिल सके

नई प्रशासनिक राजधानी: मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने सऊदी अरब को रक्षात्मक सैन्य सहायता प्रदान करने की मंजूरी लेने के लिए संसद का आपातकालीन सत्र बुलाया है। शनिवार को मिलिट्री एकेडमी में एक ग्रेजुएशन समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने इस बात की घोषणा की।
मिस्र की प्रतिनिधि सभा रविवार दोपहर 1 बजे स्थानीय समयानुसार एक पूर्ण सत्र में बैठक करेगी। संविधान के नियमों के मुताबिक, देश की सीमाओं से बाहर सैन्य संसाधनों को भेजने के लिए संसदीय मंजूरी जरूरी होती है। खबरों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को पास करने के लिए सांसदों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
राष्ट्रपति अल-सिसी ने साफ किया कि कोई भी सैन्य हस्तक्षेप पूरी तरह से रक्षात्मक होगा। यह कदम तभी उठाया जाएगा जब सऊदी नेतृत्व, जिसमें किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान शामिल हैं, औपचारिक अनुरोध करेंगे।
सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए अल-सिसी ने कहा कि वे किसी से लड़ना या हमला करना नहीं चाहते और केवल सऊदी अरब की रक्षा करेंगे। उन्होंने बताया कि यह फैसला यमन के हूती समूह द्वारा बढ़ाए गए हमलों के जवाब में लिया गया है।
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से 10 और 11 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमलों और सऊदी तेल बुनियादी ढांचे को मिलने वाली धमकियों का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी दी कि सऊदी अरब पर हमले सीधे तौर पर अरब और मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं।
अल-सिसी ने लाल सागर और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा बनाए रखने की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से मिस्र को मिले ऐतिहासिक वित्तीय, लॉजिस्टिक और सैन्य समर्थन को याद करते हुए इन खाड़ी सहयोगियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।