हूती हमलों के बीच मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के फैसले पर वोटिंग को आगे बढ़ाया
हूती हमलों के बीच मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के फैसले पर वोटिंग टाल दी है।

काहिरा: मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के अधिकार पर होने वाले महत्वपूर्ण मतदान को टाल दिया है। अब इस पर 26 अक्टूबर 2026 को फैसला लिया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले लगातार जारी हैं।
इससे पहले 18 अक्टूबर को मिस्र की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने सऊदी अरब को हर संभव मदद देने का वादा किया था। राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने साफ किया है कि यह मदद केवल रक्षात्मक होगी और सऊदी अरब की सीमा तक सीमित रहेगी। इसमें यमन के अंदर जमीनी सैन्य अभियान शामिल नहीं होंगे।
क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब 24 अक्टूबर को हूती बलों ने यमन के कोस्ट गार्ड मुख्यालय और अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसी दौरान उन्होंने सऊदी अरब के कम से कम आठ ठिकानों को भी निशाना बनाया।
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने बताया कि रियाद की तरफ भेजी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल और एक ड्रोन को नष्ट कर दिया गया है। रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट दो हफ्ते बाद फिर से खुला है, लेकिन हूती प्रवक्ता यह्या सारी ने इसे अब भी सैन्य लक्ष्य बताया है।
सुरक्षा कारणों से सऊदी सिविल डिफेंस ने 24 अक्टूबर को एक निर्देश जारी किया है। इसमें हमलों और सैन्य ठिकानों की वीडियो बनाने या उन्हें रिकॉर्ड करने पर रोक लगा दी गई है।
दूसरी तरफ, इस्तांबुल में मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक साझा बयान जारी कर हूती हमलों की निंदा की है। इन देशों ने हूतियों से सैन्य कार्रवाई रोकने और राजनीतिक बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
मिस्र की संसद ने 24 अक्टूबर को यह स्पष्ट किया कि देश फिलहाल हूतियों के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1962 से 1970 के बीच यमन युद्ध में मिस्र के हस्तक्षेप और उसमें हुए भारी नुकसान की यादें अभी भी क्षेत्रीय चर्चाओं और हूतियों की चेतावनियों में शामिल हैं।