हूती हमलों के बीच मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी ने सऊदी अरब की रक्षा के लिए सैन्य मदद देने का वादा किया

न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल: मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए किसी भी जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि हूती हमलों के बीच अपने खाड़ी सहयोगी की सुरक्षा और स्थिरता से समझौता होना उनके लिए नामुमकिन है।
शनिवार को मिलिट्री एकेडमी के ग्रेजुएशन समारोह में बोलते हुए राष्ट्रपति अल-सिसी ने साफ किया कि मिस्र युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर रियाद मदद मांगता है तो वह सैन्य सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि मिस्र की कोई भी सैन्य भागीदारी पूरी तरह रक्षात्मक होगी।
यह कदम सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देशों के तहत उठाया जाएगा। गौरतलब है कि 15 सितंबर को क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति सिसी से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की थी।
राष्ट्रपति के इस बयान के बाद मिस्र के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रविवार को दोपहर 1 बजे एक आपातकालीन सत्र बुलाया है। काउंसलर हिशाम बदावी के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा होगी और संभावित सैन्य सहायता के लिए औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।
क्षेत्र में तनाव जुलाई 2026 में यमन युद्धविराम खत्म होने के बाद बढ़ा है। हाल ही में सऊदी अरब ने रियाद, पूर्वी प्रांत और दक्षिणी क्षेत्रों में चार ड्रोन को रोकने की जानकारी दी है। इससे पहले हूती बलों ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया था जिसमें 13 लोगों की जान गई थी, साथ ही सऊदी अरामको की सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया था।
राष्ट्रपति सिसी ने दोनों देशों की पुरानी साझेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि 2013 से सऊदी अरब ने मिस्र को महत्वपूर्ण समर्थन दिया है।
इस अस्थिरता का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। लाल सागर के शिपिंग रूट बाधित होने से वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के बाद से वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमलों की वजह से स्वेज नहर को लगभग 11 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ है। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्टी ने कहा है कि इन क्षेत्रीय संघर्षों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव पड़ रहा है।