सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने पर मिस्र की संसद ने मतदान टाला अब 26 अक्टूबर को होगा फैसला

काहिरा: मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की मंजूरी से जुड़े अहम मतदान को टाल दिया है। अब इस मुद्दे पर फैसला 26 अक्टूबर 2026 को लिया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यमन में जारी संघर्ष और ईरान समर्थित हूती समूह के हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है। हूती समूह ने सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हुए हैं। इन हमलों के कारण रियाद में 26 से 29 अक्टूबर तक होने वाला 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है।
इससे पहले 17 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने घोषणा की थी कि अगर सऊदी अरब ने मदद मांगी, तो मिस्र उसकी रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। इसके बाद 18 अक्टूबर को राष्ट्रपति की अध्यक्षता वाली नेशनल डिफेंस काउंसिल ने सऊदी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सहायता देने पर सहमति जताई थी।
मिस्र के संविधान के मुताबिक, देश की सीमाओं से बाहर सैनिकों को तैनात करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की मंजूरी जरूरी है। सांसद मुस्तफा बकरी ने बताया कि नेशनल डिफेंस काउंसिल ने रक्षा मिशन को मंजूरी दे दी है, लेकिन संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया अभी जटिल बनी हुई है।
मिस्र की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने सदस्यों को इस मतदान से दूर रहने का निर्देश दिया है। पार्टी का कहना है कि मिशन के उद्देश्यों, इसमें आने वाली लागत, सैनिकों के लिए जोखिम और इस प्रतिबद्धता की समय सीमा को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच अल-अजहर के ग्रैंड इमाम शेख अहमद अल-तय्यब ने क्षेत्रीय संघर्षों को सुलझाने के लिए तत्काल मध्यस्थता की अपील की है। वहीं, यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने सऊदी अरब के लिए मिस्र द्वारा जताई गई सहायता की सराहना की है।
यमन में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और करीब 2.23 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं। सितंबर से अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।