जेरूसलम में दूतावास खोलने के फैसले पर मिस्र ने कोलंबियाई राजनयिक को तलब किया और इस कदम का कड़ा विरोध जताया

काहिरा: मिस्र ने जेरूसलम में दूतावास खोलने के कोलंबिया के फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इसके विरोध में मिस्र ने काहिरा में कोलंबिया के चार्ज डी अफेयर्स को आधिकारिक तौर पर तलब किया है।
मिस्र के अधिकारियों ने कोलंबिया के इस कदम को एक अस्वीकार्य और एकतरफा फैसला बताया है। उनका कहना है कि इससे शहर की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को नुकसान पहुंचता है। मिस्र के मुताबिक यह फैसला पूरी तरह से शून्य और अवैध है।
यह विवाद 14 अक्टूबर 2026 को दूतावास के आधिकारिक उद्घाटन के बाद शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में कोलंबिया के विदेश मंत्री ओमार बुला एस्कोबार और इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार शामिल हुए थे।
कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने इस उद्घाटन को एक रणनीतिक राजनयिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो द्वारा 2024 में इजरायल के साथ संबंध तोड़ने के फैसले को पलट दिया था।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे ताकत, साहस और विश्वास का प्रमाण बताया है।
मिस्र के अलावा सऊदी अरब, तुर्की, इंडोनेशिया, कतर, कुवैत, जॉर्डन, पाकिस्तान और फिलिस्तीन समेत 19 अरब और इस्लामी देशों ने मिलकर इस फैसले की निंदा की है। इन देशों ने कोलंबिया से अपना फैसला वापस लेने की अपील की है और कहा है कि इससे फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों और क्षेत्रीय शांति को खतरा है।
मिस्र का तर्क है कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 476 और 478 का उल्लंघन है, जो देशों को जेरूसलम में राजनयिक मिशन स्थापित करने से रोकने की बात करते हैं।
इस बीच कोलंबिया के भीतर भी सरकार की इस नीति के खिलाफ भारी विरोध देखा गया है, जहां हजारों लोग इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर सरकार के बदले हुए रुख के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।