UNGA में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, भारत ने दिया करारा जवाब

पाकिस्तान के साथ हाल ही में त्रिपक्षीय रक्षा समझौता करने वाले Turkey के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए कश्मीर विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही, जिस पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है।
तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायरे में रहकर बातचीत के जरिए हल किया जाना जरूरी है। आपको बता दें कि यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ हफ्ते पहले ही अंकारा, इस्लामाबाद और रियाद के बीच मक्का में एक रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत Saudi Arabia के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman, तुर्की के राष्ट्रपति और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif शामिल थे। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही शिमला समझौता मौजूद है, जिसके तहत दोनों देश अपने आपसी मामलों को द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत हमेशा से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू और कश्मीर देश का अभिन्न अंग है।
भारत ने पाकिस्तान को किया बेनकाब
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने नई दिल्ली में एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान की पोल खोलते हुए सिंधु जल संधि को लेकर फैलाए जा रहे झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का पुराना स्वभाव है कि वह अपने नापाक प्रचार के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है। उन्होंने साफ किया कि स्थायी मध्यस्थता अदालत का तथाकथित फैसला किसी वैध अदालत का नहीं है, बल्कि एक अवैध रूप से गठित अदालत का निर्णय है। भारत सरकार का इस मुद्दे पर रुख बहुत स्पष्ट है और इसे कई बार दोहराया जा चुका है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक अन्य घटनाक्रम में Israel के प्रतिनिधिमंडल ने तुर्की के राष्ट्रपति के भाषण के दौरान हॉल से वॉकआउट कर दिया। तुर्की के नेता ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों की कड़ी निंदा करते हुए वहां के हालात की तुलना एक आधुनिक नजरबंद शिविर से की और इजरायली सेना पर राज्य द्वारा आतंकवाद फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई के कारण कम से कम 74,000 लोग मारे गए हैं।