अमेरिका में PERM निलंबन के बीच एस्टोनिया ने भारतीय IT टैलेंट को दिया न्योता

भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों के लिए यूरोप के दरवाजे अब और भी चौड़े हो गए हैं। एस्टोनिया की न्याय और डिजिटल मामलों की मंत्री लीसा पाकोस्टा ने भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं को अपने देश के 'ई-रेजीडेंसी' (e-residency) प्रोग्राम के जरिए यूरोपीय संघ (EU) में अपना कारोबार फैलाने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका ने कई बड़ी आईटी फर्मों के लिए अपने लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को निलंबित कर दिया है।
ANI के साथ एक इंटरव्यू में मंत्री लीसा पाकोस्टा ने कहा कि भारत की तकनीकी क्षमता का एस्टोनिया में तहे दिल से स्वागत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एस्टोनिया न केवल भारतीय उत्पादों और सेवाओं को स्केल करना चाहता है, बल्कि साइबर सुरक्षा, जिम्मेदार एआई (Responsible AI) और डिजिटल पब्लिक सेवाओं के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है।
क्या है ई-रेजीडेंसी प्रोग्राम और इसके फायदे?
एस्टोनिया का ई-रेजीडेंसी प्रोग्राम दुनिया भर के उद्यमियों के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत गैर-नागरिकों को सरकार द्वारा एक डिजिटल पहचान दी जाती है, जिससे वे दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर डिजिटल रूप से अपनी कंपनी बना सकते हैं और उसे मैनेज कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें शारीरिक रूप से एस्टोनिया जाने की जरूरत नहीं होती।
टैक्स के मामले में भी यह प्रोग्राम काफी आकर्षक है। कंपनियों के लिए रिटेन्ड प्रॉफिट पर कॉर्पोरेट टैक्स की दर 0% है, हालांकि डिविडेंड वितरण पर 22/78 की दर से टैक्स लगता है और स्टैंडर्ड वैट (VAT) रेट 24% है। आवेदन शुल्क की बात करें तो वर्तमान में यह 150 यूरो है, जो 1 जनवरी 2027 से बढ़कर 165 यूरो हो जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि यह आमंत्रण अमेरिका के एक कड़े फैसले के ठीक बाद आया है। 8 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने घोषणा की थी कि माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी आठ बड़ी आईटी कंपनियों के लिए 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम को निलंबित कर दिया गया है। अमेरिका ने यह कदम एच-1बी और PERM प्रोग्राम के अनुपालन और धोखाधड़ी की जांच के चलते उठाया है।