यूरोपीय संघ और जीसीसी देशों ने सुरक्षा और व्यापार को मजबूत करने के लिए रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया

ब्रुसेल्स: यूरोपीय संघ और जीसीसी सदस्य देशों ने सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की मांग की है। यह बात शुक्रवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद और जीसीसी देशों की शूरा, प्रतिनिधि, राष्ट्रीय और उम्माह परिषदों की दूसरी बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कही गई।
बैठक में यूरोपीय संसद के अध्यक्ष और जीसीसी विधायी परिषदों के अध्यक्ष शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यूरोप और खाड़ी देशों के बीच की यह साझेदारी स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि अगले यूरोपीय संघ-जीसीसी शिखर सम्मेलन में सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और सतत विकास पर संसदीय सहयोग को प्राथमिकता दी जाए।
बयान में समुद्री, जमीनी, हवाई और डिजिटल परिवहन मार्गों को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसमें कहा गया कि ईरान और उसके समर्थकों द्वारा लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में किए गए हमलों से यह साफ हो गया है कि दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा और समृद्धि एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। ऊर्जा के मोर्चे पर प्रतिनिधियों ने आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति में विविधता लाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कही।
आर्थिक संबंधों को लेकर दोनों पक्षों ने एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत देने का आग्रह किया, ताकि यूरोपीय संघ और जीसीसी के बीच एक व्यापक और संतुलित मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत दोबारा शुरू हो सके। इसके साथ ही सप्लाई चेन को सुरक्षित करने, वित्तीय चैनलों की सुरक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन को रोकने पर भी जोर दिया गया।
लोगों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए दोनों पक्षों ने जीसीसी के बाकी पांच देशों के लिए पारस्परिक वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के नागरिक, आर्थिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई। प्रतिभागियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हुए जीसीसी देशों के साथ एकजुटता जताई और ईरान व उसके समर्थकों से तुरंत हमले रोकने की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का पालन करने के महत्व पर भी जोर दिया।